अतिक्रमण से गैर मुमकिन बरसाती नाले का बहाव रुका, बारिश का पानी खेतों में घुसने से किसानों की फसल बर्बाद होने का आरोप।
गंगापुर सिटी। रास्ता खोलो अभियान के बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में शिकायतों के निस्तारण और जमीनी हकीकत के बीच अंतर का मामला सामने आया है। वजीरपुर तहसील की ग्राम पंचायत जीवली के ग्राम बेनीपुर क्षेत्र में गैर मुमकिन बरसाती नाला खसरा नंबर 142 कथित अतिक्रमण के कारण अवरुद्ध होने से बारिश का पानी खेतों में घुस गया। इससे किसानों की फसलें खराब होने का आरोप है।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसाती नाले पर अतिक्रमण और इसके बहाव क्षेत्र में मिट्टी डालने की शिकायत कई बार मुख्यमंत्री, 181 संपर्क पोर्टल तथा जिला स्तर पर की गई। शिकायतों पर उच्च स्तर से आदेश भी हुए, लेकिन किसानों के अनुसार मौके पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों तक सीमित रह गया।
तीन किलोमीटर लंबा है बरसाती नाला
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम बेनीपुर के पूर्व-दक्षिण क्षेत्र से होकर गुजरने वाला गैर मुमकिन बरसाती नाला एवं आम रास्ता खसरा नंबर 142 करीब 3 किलोमीटर लंबा और 20 से 25 मीटर चौड़ा है। वर्षा काल में यह नाला अरावली पहाड़ियों से आने वाले पानी को आगे ले जाकर ग्राम पंचायत टोकसी के तालाब को भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
नाले के दोनों ओर पानी को खेतों में जाने से रोकने के लिए सुरक्षा ढाय बनी हुई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोगों ने नाले की सीमा और सुरक्षा ढाय की भूमि को अपने खेतों में शामिल कर लिया, जिससे कई स्थानों पर नाले की चौड़ाई घटकर लगभग 4 मीटर रह गई है।
नाले में मिट्टी डालकर बहाव क्षेत्र किया अवरुद्ध
ग्रामीणों का आरोप है कि नाले के कई हिस्सों में दो से तीन फीट तक मिट्टी डाल दी गई है, जिससे बरसाती पानी का प्राकृतिक बहाव बाधित हो गया। नाले का बहाव क्षेत्र ऊंचा होने के कारण बारिश के दौरान पानी आगे जाने के बजाय आसपास के खेतों में फैल जाता है।
हाल में हुई बारिश के दौरान भी नाले का पानी खेतों में घुस गया, जिससे किसानों की खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा। किसानों का कहना है कि यदि नाले को उसके मूल स्वरूप में बहाल कर दिया जाए तो बरसाती पानी निर्धारित रास्ते से होकर तालाब तक पहुंच सकता है और खेतों में जलभराव की समस्या कम हो सकती है।
मुख्यमंत्री और संपर्क पोर्टल पर शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं
पीड़ित किसानों के अनुसार उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार 181 संपर्क पोर्टल, मुख्यमंत्री स्तर तथा जिला प्रशासन के समक्ष शिकायतें दर्ज कराईं। शिकायतों के बाद संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की जानकारी भी मिली, लेकिन मौके पर नाले का सीमा ज्ञान तक नहीं कराया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन द्वारा समय रहते नाले की पैमाइश कर अतिक्रमण हटाया जाता और बहाव क्षेत्र को मूल स्वरूप में बहाल किया जाता तो बारिश का पानी खेतों में नहीं भरता।
फसल खराब होने से किसानों में नाराजगी
बारिश का पानी खेतों में भरने से किसानों की फसल खराब होने का आरोप है। किसानों का कहना है कि वे पूरे साल मेहनत कर फसल तैयार करते हैं। ऐसे में जल निकासी की सरकारी व्यवस्था बाधित होने के कारण फसल बर्बाद होना उनके लिए बड़ा आर्थिक नुकसान है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि खसरा नंबर 142 के गैर मुमकिन बरसाती नाले का तत्काल सीमा ज्ञान कराया जाए, अतिक्रमण हटाया जाए और नाले को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए।
जवाबदेही तय करने की मांग
ग्रामीणों ने कहा कि यदि सरकारी भूमि और प्राकृतिक जल निकासी के मार्ग पर अतिक्रमण हुआ है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही पूर्व में दर्ज शिकायतों के निस्तारण की भी समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिकायतों पर वास्तविक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि रास्ता खोलो अभियान के तहत केवल कागजी कार्रवाई के बजाय मौके पर वास्तविक स्थिति की जांच कर समस्या का स्थायी समाधान कराया जाए। उनका कहना है कि आम रास्तों और बरसाती नालों को अतिक्रमण मुक्त रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, जिससे किसानों और ग्रामीणों को भविष्य में ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
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Gangapur City, Rajasthan
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