बांकीपुर धरा में कृष्ण लीलाओं की बही बयार, कथा सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु


भागवत कथा के छठवें दिन कालिया मर्दन, कंस वध और रुक्मणी विवाह की कथा सुन श्रद्धालु भक्ति में भाव-विभोर हो उठे।

प्रयागराज। यमुनानगर के बारा तहसील अंतर्गत बांकीपुर धरा गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत पुराण कथा अब अपने विराम की ओर है, लेकिन कथा स्थल पर भक्ति का उत्साह चरम पर पहुंच गया है। समाजसेवी मनोज मिश्रा सपरिवार द्वारा अपने पूज्य पिताजी के वार्षिक श्राद्ध पर आयोजित इस भागवत ज्ञान यज्ञ के छठवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की अलौकिक लीलाओं का वर्णन किया गया। कथा के दौरान पूरा पंडाल तालियों और जयकारों से गूंज उठा।

कथा का अमृतपान करा रहे परम पूज्य भागवताचार्य पं. बृज बिहारी तिवारी जी महाराज ने छठवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की तीन प्रमुख लीलाओं का भावपूर्ण और सजीव वर्णन किया। कथा के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भक्ति और भावनाओं से भर दिया।

कालिया मर्दन की कथा ने मोहा मन

महाराज जी ने कालिया मर्दन की कथा सुनाते हुए बताया कि यमुना नदी में कालिया नाग के विष के कारण ब्रजवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में बालकृष्ण ने यमुना में छलांग लगाकर कालिया नाग के हजारों फनों पर नृत्य किया और उसे परास्त किया।

कथा के माध्यम से महाराज जी ने बताया कि अन्याय और विष चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में सत्य की ही विजय होती है। कालिया मर्दन की कथा सुनकर श्रद्धालु भक्ति भाव में डूब गए और कथा पंडाल में भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे गूंजने लगे।

कंस वध से दिया धर्म की विजय का संदेश

इसके बाद भागवताचार्य पं. बृज बिहारी तिवारी जी महाराज ने कंस वध की रोमांचक कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि कंस के निमंत्रण पर श्रीकृष्ण और बलराम मथुरा पहुंचे, जहां उन्होंने चाणूर और मुष्टिक जैसे पहलवानों का सामना किया। इसके बाद अत्याचारी मामा कंस का वध कर भगवान श्रीकृष्ण ने अपने माता-पिता वासुदेव और देवकी को कारागार से मुक्त कराया।

कंस वध की कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। कथा पंडाल में “कृष्ण कन्हैया लाल की जय” के जयकारे गूंज उठे और वातावरण भक्तिमय हो गया।

रुक्मणी विवाह की कथा ने किया भाव-विभोर

कथा के अंतिम प्रसंग में महाराज जी ने रुक्मणी विवाह की भावपूर्ण कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि रुक्मणी जी के पत्र पर भगवान श्रीकृष्ण द्वारका से पहुंचे और रुक्मणी हरण के बाद उनसे विवाह किया।

रुक्मणी विवाह की कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रेम और समर्पण के भाव का संदेश दिया गया। इस प्रसंग के दौरान कथा पंडाल में श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए और वातावरण श्रीकृष्ण की भक्ति से सराबोर हो गया।

सात दिवसीय भागवत ज्ञान यज्ञ के छठवें दिन कृष्ण की विभिन्न लीलाओं के वर्णन के साथ कथा का उत्साह चरम पर पहुंच गया। अब कथा अपने अंतिम चरण में है और श्रद्धालुओं में समापन कार्यक्रम को लेकर भी उत्साह बना हुआ है।

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