डर्फ सलाहकार मंडल की सत्रारम्भ बैठक आयोजित, शिक्षा नवाचार पर मंथन


डाईट सवाई माधोपुर में शैक्षणिक उन्नति, शोध कार्यों के चयन और नई शिक्षा नीति आधारित नवाचारों पर हुई विस्तृत चर्चा

सवाई माधोपुर। डर्फ सलाहकार मंडल बैठक का आयोजन जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाईट) सवाई माधोपुर में किया गया। राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद उदयपुर के निर्देशन में आयोजित इस सत्रारम्भ बैठक में जिले के शैक्षिक उन्नयन, वर्तमान शैक्षणिक सत्र में महत्वपूर्ण विषयों पर शोध कार्यों के चयन तथा उनके निष्कर्षों के शैक्षिक उपयोग को लेकर व्यापक चर्चा की गई।

बैठक की अध्यक्षता डाईट प्राचार्य एवं जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक) देवीलाल मीना ने की। इस दौरान जिले में शैक्षिक अनुसंधान को बढ़ावा देने, नवाचारों को प्रोत्साहित करने तथा शिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर विचार-विमर्श किया गया।

वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत कर शोध कार्यों की जानकारी दी गई

डर्फ सलाहकार मंडल के सचिव, प्रभागाध्यक्ष एवं प्रभारी आईएफआईसी राजेन्द्र कुमार वर्मा ने सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए बैठक के एजेंडे पर प्रकाश डाला। उन्होंने सत्र 2025-26 का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि जिले में शोध कार्यों का शत-प्रतिशत लक्ष्य निर्धारित समयावधि में पूर्ण किया गया।

उन्होंने आगामी सत्र के शोध कार्यों की रूपरेखा पर भी विस्तार से जानकारी दी। साथ ही बैठक में उपस्थित शोधार्थियों को गत सत्र में किए गए शोध कार्यों के लिए प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में डाईट की भूमिका पर दिया जोर

डाईट उपप्राचार्य राजेश कुमार गर्ग ने अपने संबोधन में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुसंधान कार्यों में डाईट की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए शोध आधारित कार्यों को निरंतर प्रोत्साहित करना आवश्यक है।

बैठक में उपस्थित डर्फ सलाहकार मंडल के सदस्यों ने जिले की शैक्षणिक उन्नति, शिक्षा में नवाचार तथा नई शिक्षा नीति आधारित शोध गतिविधियों को गति देने के लिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव भी प्रस्तुत किए।

शैक्षिक अनुसंधान से ही संभव है समस्याओं का समाधान : देवीलाल मीना

अध्यक्षीय उद्बोधन में डाईट प्राचार्य देवीलाल मीना ने कहा कि शैक्षिक समस्याओं का समाधान शैक्षिक अनुसंधान के माध्यम से ही संभव है।

उन्होंने बताया कि सत्र 2026-27 में नई शिक्षा नीति के तहत तथा जिले की सामाजिक, भौगोलिक और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शोध विषयों का चयन किया जाएगा। इससे जिले की शैक्षिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायता मिलेगी।

उन्होंने कहा कि स्थानीय आवश्यकताओं और वास्तविक शैक्षिक चुनौतियों पर आधारित शोध कार्य शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

शोध गुणवत्ता बढ़ाने और अवसर उपलब्ध कराने पर जोर

बैठक में मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रतिनिधि पारस चन्द जैन, राहुल सिंह गुर्जर, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक प्रतिनिधि डॉ. सुरेन्द्र कुमार, डॉ. रघुवीर शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारम्भिक प्रतिनिधि सांवलराम मीना, एडीपीसी प्रतिनिधि हेमराज मीना तथा डाईट प्राचार्य प्रतिनिधि ओमप्रकाश मीना सहित कार्यकारिणी सदस्यों ने भाग लिया।

सभी सदस्यों ने जिले में शोध की गुणवत्ता बढ़ाने तथा शिक्षकों को शैक्षिक अनुसंधान के अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया। साथ ही शिक्षा क्षेत्र में नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी योजनाओं पर भी चर्चा की गई।

शोध कार्यों के उन्नयन पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

बैठक के दौरान वरिष्ठ व्याख्याता डाईट श्रीकांत शर्मा एवं डॉ. अनिता राठौड़ ने शोध कार्यों के उन्नयन और उनकी उपयोगिता पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने शोध गतिविधियों को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुखी बनाने के सुझाव भी दिए।

नवाचारों को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ बैठक संपन्न

बैठक के अंत में प्रभागाध्यक्ष एवं प्रभारी आईएफआईसी राजेन्द्र कुमार वर्मा ने उपस्थित अधिकारियों एवं सदस्यों का आभार व्यक्त किया।

आगामी सत्र में जिले की शैक्षिक गतिविधियों को नई गति देने, शोध कार्यों को प्रोत्साहित करने तथा शिक्षा क्षेत्र में नवाचारों को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ बैठक का समापन किया गया।

यह भी पढ़ें:


Aawaz Aapki News WhatsApp चैनल से जुड़ें:

सबसे तेज़ और ताज़ा खबरें सीधे अपने व्हाट्सएप पर पाएं।

WhatsApp अभी जुड़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *