शस्त्र पूजन के बाद निकला पथ संचलन, वरिष्ठ प्रचारक देवाराम ने हिंदू जागरण, पंच परिवर्तन और कुटुंब प्रबोधन पर दिया जोर
शाहपुरा। विजयदशमी के पर्व पर शाहपुरा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का विजयदशमी महोत्सव मंगलवार को परंपरा, अनुशासन और संगठनात्मक एकजुटता के संदेश के साथ मनाया गया। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में आयोजित कार्यक्रम में नगर के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों स्वयंसेवक एकत्र हुए। पारंपरिक गणवेश में सुसज्जित स्वयंसेवकों की कतारें, घोष की धुन, ध्वज प्रणाम और सामूहिक प्रार्थना आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहे। समारोह के बाद निकले पथ संचलन का शहर के विभिन्न मार्गों पर नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
शस्त्र पूजन और ध्वज प्रणाम से हुआ शुभारंभ
विजयदशमी महोत्सव की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुई। कार्यक्रम में अतिथियों ने शस्त्र पूजन और घोष पूजन किया। इसके बाद ध्वजारोहण कर स्वयंसेवकों ने भगवा ध्वज को प्रणाम किया और संघ की प्रार्थना का सामूहिक वाचन किया।
पूरे आयोजन में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार गतिविधियां संपन्न हुईं। वक्ताओं ने सामाजिक एकता, पारिवारिक संस्कार और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण से जुड़े विषयों पर विचार रखे।
युवाओं के आदर्श और सांस्कृतिक चेतना पर जोर
समारोह में संघ के वरिष्ठ प्रचारक देवाराम ने मुख्य वक्ता के रूप में बौद्धिक संबोधन दिया। उन्होंने हिंदू जागरण की महत्ता पर विचार रखते हुए संघ की स्थापना से लेकर अब तक की यात्रा, सामाजिक परिस्थितियों और बदलते वैश्विक परिवेश का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि पश्चिमी सभ्यता के अंधानुकरण से उत्पन्न चुनौतियों पर समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए। युवा पीढ़ी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह तय करना जरूरी है कि नई पीढ़ी किन लोगों को अपना आदर्श मानती है और किन मूल्यों के आधार पर अपना भविष्य तैयार करती है।
देवाराम ने इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के बीच युवाओं को सही जानकारी, संस्कार और विवेकपूर्ण दृष्टिकोण देने की जिम्मेदारी परिवार और समाज की बताई। उन्होंने भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा सामाजिक संगठन को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया।
पंच परिवर्तन और कुटुंब प्रबोधन का संदेश
वरिष्ठ प्रचारक ने संघ के पंच परिवर्तन के विचार को घर-घर तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कुटुंब प्रबोधन यानी परिवार में संस्कार, संवाद और आपसी संबंधों को मजबूत बनाने पर जोर दिया।
संयुक्त परिवारों की उपयोगिता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि परिवार केवल साथ रहने की व्यवस्था नहीं, बल्कि पीढ़ियों के बीच अनुभव, संस्कार और जिम्मेदारियों के हस्तांतरण का माध्यम भी है।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी को प्रोत्साहन, सांस्कृतिक पहचान के प्रति जागरूकता और नागरिक कर्तव्यों के निर्वहन जैसे विषयों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, सकारात्मक सामाजिक बदलाव की शुरुआत व्यक्ति और परिवार से होती है। परिवार में संवाद और संस्कार मजबूत होने से सामाजिक समरसता और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना को बढ़ावा मिल सकता है।
देवाराम ने जातिगत अहंकार और सामाजिक विभाजन से उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए परस्पर सम्मान, सामाजिक समरसता और साझा सांस्कृतिक चेतना के माध्यम से समाज को एकजुट रखने की आवश्यकता बताई।
घोष की धुन पर निकला पथ संचलन
महोत्सव के समापन के बाद स्वयंसेवकों का पथ संचलन निकाला गया। निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए स्वयंसेवकों की कतारें शहर के प्रमुख रास्तों से आगे बढ़ीं। घोष की धुन पर एक समान कदमताल करते स्वयंसेवकों का दृश्य आकर्षण का केंद्र रहा।
पथ संचलन के मार्ग में जगह-जगह नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। इस दौरान शहर में उत्सव जैसा माहौल नजर आया। स्वयंसेवकों की अनुशासित चाल, एकरूपता और सामूहिक सहभागिता ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
नगर कार्यवाह घनश्याम सिंह ने पथ संचलन और अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में स्वयंसेवकों को आवश्यक निर्देश दिए। संचलन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए शाहपुरा थाना प्रभारी लीलाधर मालवीय के नेतृत्व में पुलिस जाप्ता तैनात रहा।
पदाधिकारियों ने जताया आभार
कार्यक्रम में विभाग कार्यवाह श्रवण ने भी संबोधित किया। नगर संघचालक कन्हैयालाल वर्मा ने समारोह में उपस्थित अतिथियों, स्वयंसेवकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
आयोजन में वरिष्ठ स्वयंसेवक दुर्गालाल जांगिड़, शंकरलाल तोषनीवाल, देवेंद्र बेली और कन्हैयालाल धाकड़, विनोद सनाठ्य सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक मौजूद रहे।
शाहपुरा में आयोजित विजयदशमी महोत्सव में शस्त्र पूजन, ध्वज प्रणाम, सामूहिक प्रार्थना और पथ संचलन के माध्यम से संघ की परंपराओं का निर्वहन किया गया। वहीं, बौद्धिक संबोधन में परिवार, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और सांस्कृतिक चेतना जैसे विषयों पर विचार रखे गए।
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Bhilwara, Rajasthan
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