अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एमएसएमई, स्टार्टअप, हस्तशिल्प और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए
जयपुर।पंकज शर्मा। अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस के अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर बड़ी घोषणाएं करते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, हस्तशिल्प, स्टार्टअप और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र प्रदेश की आर्थिक प्रगति, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता की रीढ़ है।
मुख्यमंत्री ने जयपुर स्थित कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि राज्य सरकार युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित कर रही है और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
राजस्थान में एमएसएमई क्षेत्र का तेजी से विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की नीतियों और उद्यमियों के प्रयासों के चलते राजस्थान में 33 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयाँ स्थापित हैं। इसके साथ ही राजस्थान देश का चौथा सबसे बड़ा एमएसएमई राज्य बन गया है। उन्होंने इसे राज्य की बड़ी उपलब्धि बताया।
कार्यक्रम में उन्होंने यह भी कहा कि राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के बाद राज्य में निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति मिली है।
औद्योगिक भूखंड आवंटन और सुधारों पर जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने डायरेक्ट अलॉटमेंट पॉलिसी-2025 लागू की है, जिसके तहत पिछले एक वर्ष में 1600 से अधिक औद्योगिक भूखंडों का आवंटन किया गया है।
इसके अलावा, 23 प्राथमिक क्षेत्रों में सुधार लागू किए गए हैं। शहरी क्षेत्रों में एमएसएमई इकाइयों के लिए लैंड यूज अप्रूवल की समय सीमा 60 दिनों से घटाकर 30 दिन कर दी गई है। वहीं उद्योग शुरू करने की स्वीकृति की समय सीमा 120 दिनों से घटाकर 30 दिन कर दी गई है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विकास के लिए रिप्स-2024 में कई संशोधन किए गए हैं। अब न्यूनतम निवेश सीमा घटाकर 15 करोड़ रुपये कर दी गई है।
साथ ही ईसीएमएस योजना के अंतर्गत आने वाली परियोजनाओं को 5 चरणों में निवेश की अनुमति दी गई है, जिससे निवेश प्रक्रिया और आसान होगी।
स्टार्टअप और हस्तशिल्प को नई दिशा
राजस्थान वेंचर कैपिटल फंड के माध्यम से इस वर्ष 25 नए स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता देने की घोषणा की गई है। इसके अलावा हस्तशिल्पियों, बुनकरों और सूक्ष्म उद्यमों के उत्पादों के लिए पीपीपी मॉडल पर हाट विकसित किए जाएंगे।
पहले चरण में पुष्कर, नाथद्वारा, जैसलमेर और अलवर में हाटों का विकास किया जाएगा।
नई योजनाओं और नीतियों का विमोचन
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राजस्थान औद्योगिक विकास नीति, ओडीओपी कॉफी टेबल बुक का विमोचन और रैम्प (RAMP) पोर्टल का शुभारंभ किया।
इसके साथ ही उन्होंने उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत लाभार्थियों को 13 करोड़ रुपये से अधिक के चेक और भूमि आवंटन पत्र वितरित किए।
औद्योगिक क्षेत्र में नई पहल और भविष्य की योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सोलर पैनल मैन्युफैक्चरिंग पार्क, सिरेमिक पार्क, डाटा सेंटर पार्क और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पार्क जैसे औद्योगिक केंद्र विकसित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विकसित ग्राम-वार्ड अभियान के माध्यम से हर जिले में स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
उद्योग मंत्री और अन्य अधिकारियों के बयान
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि सरकार उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है और नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया जा रहा है।
वहीं उद्योग एवं वाणिज्य राज्यमंत्री के. के. विश्नोई ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एमएसएमई, कौशल विकास और उद्योग क्षेत्र को नई गति मिली है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल और मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित कई वरिष्ठ अधिकारी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
लाभार्थियों का संवाद और आभार
कार्यक्रम में उद्यमियों ने मुख्यमंत्री से संवाद किया और राज्य सरकार की उद्योग प्रोत्साहन नीतियों की सराहना की। उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं से उन्हें व्यवसाय विस्तार और रोजगार सृजन में मदद मिल रही है।

Gangapur City, Rajasthan
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