गंगापुर सिटी में कांग्रेस की रणनीति पर सवाल, कुबेर को सभापति चेहरा बनाने पर चर्चा


2020 में 11 सीटों पर रुखसाना बानो को प्रत्याशी बनाने के बाद 2026 में 27 सीटों पर कुबेर को आगे करने पर उठे सवाल

गंगापुर सिटी।नगर परिषद सभापति चुनाव को लेकर गंगापुर सिटी की सियासत में घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस की ओर से कृष्ण कुमार गोयल ‘कुबेर’ को सभापति पद के लिए प्रत्याशी बनाए जाने के बाद कांग्रेस की पिछली रणनीति को लेकर राजनीतिक सवाल खड़े हो रहे हैं।

2020 और 2026 की रणनीति में बदलाव बना चर्चा का विषय

सियासी चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा वर्ष 2020 और 2026 के नगर परिषद चुनावों के बीच कांग्रेस की रणनीति में आया बदलाव है। वर्ष 2020 में कांग्रेस के खाते में महज 11 पार्षद आए थे। उस समय कांग्रेस ने रुखसाना बानो को सभापति पद के लिए अपना प्रत्याशी बनाया था और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में नामांकन भी दाखिल किया था।

अब वर्ष 2026 के नगर परिषद चुनाव में तस्वीर बदली है। कांग्रेस ने 60 में से 27 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि भाजपा के 17 और निर्दलीय प्रत्याशियों के 16 पार्षद निर्वाचित हुए हैं। सभापति चुनाव में बहुमत का आंकड़ा 31 है।

27 पार्षदों के बावजूद कुबेर को चेहरा बनाने पर सवाल

ऐसे में राजनीतिक चर्चा का एक प्रमुख सवाल यह है कि जब कांग्रेस के पास केवल 11 पार्षद थे, तब मुस्लिम समाज की रुखसाना बानो को सभापति पद के लिए अधिकृत चेहरा बनाया गया, लेकिन आज कांग्रेस के पास 27 पार्षद हैं और पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है, तो सभापति पद के लिए कृष्ण कुमार गोयल ‘कुबेर’ को आगे किया गया है।

वर्तमान कांग्रेस में सर्वाधिक पार्षद मुस्लिम समाज से होने की बात भी चर्चा में है। इसके बावजूद सभापति पद के लिए मुस्लिम समाज से किसी पार्षद को प्रत्याशी नहीं बनाए जाने को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।

‘दोहरी नीति’ के आरोपों पर कांग्रेस से स्पष्टीकरण की अपेक्षा

इसी बदलाव को लेकर विरोधियों की ओर से कांग्रेस की रणनीति पर ‘दोहरी नीति’ के आरोप लगाते हुए सवाल उठाए जा रहे हैं। राजनीतिक बहस में यह प्रश्न भी सामने आ रहा है कि क्या अलग-अलग चुनावी परिस्थितियों में सामाजिक प्रतिनिधित्व के अलग-अलग मापदंड अपनाए गए हैं।

राजनीतिक रूप से यह सवाल भी चर्चा में है कि क्या 2020 में मुस्लिम समाज को प्रतिनिधित्व देने का निर्णय उस समय की चुनावी परिस्थितियों तक सीमित था। वहीं, वर्ष 2026 में कांग्रेस के सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के बाद पार्टी ने सभापति पद के लिए कुबेर को ही अधिकृत चेहरा क्यों चुना, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि, इन सवालों पर कांग्रेस का आधिकारिक पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण है। प्रत्याशी चयन के पीछे पार्टी की आधिकारिक वजह क्या है और 2020 में रुखसाना बानो तथा 2026 में कुबेर को प्रत्याशी बनाए जाने के पीछे क्या राजनीतिक समीकरण रहे, इस पर कांग्रेस नेतृत्व ही स्पष्ट जवाब दे सकता है।

बहुमत से चार सीट दूर कांग्रेस, निर्दलीयों की भूमिका अहम

2026 के नगर परिषद चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस बहुमत के आंकड़े 31 से चार सीट दूर है। ऐसे में 16 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका सभापति चुनाव में महत्वपूर्ण हो गई है।

कांग्रेस को सभापति पद हासिल करने के लिए अपने 27 पार्षदों के अलावा अन्य पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा। इसी वजह से सभापति चुनाव से पहले राजनीतिक जोड़-तोड़, बैठकों और पार्षदों के बीच संपर्क को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।

सामाजिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक समीकरण पर निगाह

सभापति चुनाव अब केवल एक पद के चुनाव तक सीमित नहीं रह गया है। इसके साथ कांग्रेस की रणनीति, सामाजिक प्रतिनिधित्व और अन्य पार्षदों से समर्थन जुटाने की क्षमता भी चर्चा के केंद्र में है।

गंगापुर सिटी में अब यह सवाल भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बना हुआ है कि सियासत में सिद्धांत स्थायी रहते हैं या चुनावी परिस्थितियों और राजनीतिक समीकरणों के साथ रणनीति बदलती है।

आगामी सभापति चुनाव में किसे पार्षदों का समर्थन मिलता है और चुनाव का अंतिम परिणाम क्या रहता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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