चिकित्सा विभाग द्वारा की जा रही एंटी लार्वा एक्टिविटी


सवाई माधोपुर, 3 नवंबर। मौसम में बदलाव के साथ ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय होकर मच्छरजनित स्थानों की जांच कर उन्हें नष्ट कर रही है। फॉगिंग, एंटी लार्वा और जनजागरुता गतिविधिया की जा रही है। समस्त स्वास्थ कर्मियों द्वारा फील्ड में उतरकर व्यापक सर्वे और आमजन को जागरुक किया जा रहा है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जेमिनी ने बताया कि जिले में मचछर जनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। इसलिए स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा घर-घर में व्यापक सर्वे, एंटीलॉर्वल एक्टीविटी एवं एवं जनजागरुकता कार्य किये जा रहे हैँ। सर्वे मे मचछरो के लार्वा की पहचान कर उसे नष्ट करने, जहां पानी जमा होने की संभावना अधिक है, जैसे कि कूलर, गमले, टूटे बर्तन, टायर करने उन्हे साफ करवा कर लार्वा नष्ट करने, सर्वे के दौरान जहां भी मच्छर का लार्वा पाया जा रहा है, उसे तुरंत नष्ट करने का कार्य किया जा रहा है। लोगों को समझाया जा रहा है कि वे अपने घर और आस-पास पानी जमा न होने दें। शहर व गांवों में फॉगिंग और एंटी लार्वा गतिविधिया की जा रही है ताकि व्यस्क मच्छरों व लार्वा को नियंत्रित किया जा सके।
सीएमएचओ ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि डेंगू से बचाव के लिए सामुदायिक भागीदारी बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि रविवार को हर व्यक्ति अपने घर के सभी बर्तनों कूलों, गमलों, परिंडों, छतों पर रखें टायरों और टंकियों को खाली करके सूखाएं, ताकि उसमें पनप रहा लार्वा मच्छर बनने से पहले ही नष्ट हो जाए। उन्होंने कहा कि घरों में जमा साफ पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण होता है। ऐसे में जमा पानी को गिराकर नष्ट कर देना चाहिए ताकि लार्वा मच्छर नष्ट हो सकें। यदि तेन बुखार, गंभीर सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द, उल्टी या जी मिचलाना, शरीर पर दाने लक्षण दिखाई दें, तो खुद इलाज बिल्कुल न करें। झोलाछाप से बचें, तुरंत डॉक्टर से परामर्श और उपचार ले। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं बिल्कुल न ले।
डेंगू फैलाने वाला मच्छर (एडीज) साफ और ठहरे हुर पानी में पनपता है और दिन में काटता है। इसलिए अपने घर और आस-पास कहीं भी पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले, टूटे बर्तन, टायर और अन्य कंटेनरों को नियमित रूप से खाली करें और सुखाएं या उनमें पानी बदलें। यदि पानी जमा हो तो उसमें मिट्टी का तेल या लार्वांनाशक दवा डालें। इसके अलावा पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें, सुबह और शाम के समय। सोते समय मचछर दानी का प्रयोग करें, खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगवाएं।


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