दवाइयों और इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर मनमानी कीमत वसूलने का आरोप; केंद्र सरकार से सख्त कानून बनाने की मांग
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। बाजार में अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के नाम पर उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों से हो रही कथित लूट के विरोध में अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने बड़ा कदम उठाया है। संगठन के पदाधिकारियों ने इस संगठित मुनाफ़ाखोरी के खिलाफ भीलवाड़ा जिलाधीश (कलेक्टर) को एक ज्ञापन सौंपा है। इसके साथ ही केंद्र सरकार को भी उचित कार्रवाई के लिए पत्र प्रेषित किया गया है।
कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने प्रशासन का ध्यानाकर्षण करते हुए कहा कि वर्तमान में सरकार द्वारा MRP निर्धारण पर कोई कड़ा नियंत्रण या स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं। इसका फायदा उठाकर निर्माता कंपनियां मनमाने ढंग से वास्तविक लागत से कई गुना अधिक दाम प्रिंट कर रही हैं।
संगठन ने मुख्य रूप से दो सेक्टरों पर चिंता जताई:
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दवाइयां (Medicines): एक ही साल्ट की दवा अलग-अलग कीमतों पर बेची जा रही है।
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इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं (Electronic Goods): इनमें भी कीमतों का भारी अंतर देखने को मिल रहा है।
संगठन का बयान: “कंपनियां अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) बढ़ाकर अनुचित आर्थिक लाभ कमा रही हैं। इस बेलगाम मुनाफाखोरी का सीधा असर आम और मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब पर पड़ रहा है।”
पारदर्शी सीमा तय करने की आवश्यकता
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने केंद्र सरकार से पुरजोर मांग की है कि इस लूट को रोकने के लिए तत्काल एक प्रभावी और सख्त कानून बनाया जाए। एमआरपी निर्धारण की एक पारदर्शी सीमा तय होनी चाहिए, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।
ज्ञापन सौंपने के दौरान ये रहे उपस्थित: इस अवसर पर प्रांत अध्यक्ष रोशन लाल तोतला, जिलाध्यक्ष सत्यनारायण वैष्णव, शिव बाल्दी, सचिव प्रकाश चन्द माणमिया, सहसचिव भगवती लाल जोशी, रामराज वैष्णव, महेन्द्र शर्मा सहित संस्था के कई पदाधिकारी और वरिष्ठ कार्यकर्ता मौजूद रहे।