प्रेम और करुणा की बही सरिता; रुक्मिणी मंगल के प्रसंग पर भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
शाहपुरा। (मूलचन्द पेसवानी) शाहपुरा क्षेत्र के विजयपुर में भक्ति और आध्यात्म की अविरल धारा बह रही है। राव नरेन्द्र सिंह के कृषि फार्म पर मूंदड़ा परिवार द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन महारास और रुक्मिणी मंगल के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान भक्ति के साथ-साथ सेवा का भी अनूठा संगम देखने को मिला, जब कथा में आई ₹2 लाख की भेंट राशि को गौशाला के लिए दान कर दिया गया।
महारास: विकारों से मुक्ति और ईश्वर से मिलन कथावाचक दिग्विजयराम ने महारास की व्याख्या करते हुए इसे विश्व की सबसे अद्भुत और पवित्र घटना बताया। उन्होंने कहा कि महारास केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि जीवात्मा का परमात्मा से मिलन है। इसमें केवल वही प्रवेश पा सके जिनके मन में कोई सांसारिक विकार नहीं था। दिग्विजयराम ने जोर देकर कहा कि आज के दौर में मनुष्य दूसरों को दुःख देकर सुखी होना चाहता है, जो कि असंभव है। सच्चा सुख केवल दूसरों की सेवा और उनके कष्टों को हरने में ही निहित है।
भक्ति में व्याकुलता अनिवार्य भक्ति के गूढ़ रहस्यों को समझाते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार जल के बिना मछली तड़पती है, उसी प्रकार भगवान के दर्शन के लिए भक्त के मन में व्याकुलता होनी चाहिए। उन्होंने आधुनिक समाज की विसंगतियों पर प्रहार करते हुए कहा कि नारी को नारी का सम्मान करना चाहिए और ममत्व व प्रेम जैसे शाश्वत मूल्यों को जीवन में पुनः स्थापित करना चाहिए।
रुक्मिणी मंगल और गौ-सेवा का संकल्प कथा के दौरान जरासंध वध, शिशुपाल वध और गोपी प्रसंग की जीवंत प्रस्तुति दी गई। रुक्मिणी विवाह (रुक्मिणी मंगल) के प्रसंग पर पंडाल जयकारों से गूंज उठा। इस शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित की गई लगभग ₹2 लाख की राशि को व्यासपीठ के आह्वान पर तत्काल नृसिंह गौशाला, विजयपुर को भेंट कर दिया गया। आयोजन समिति और श्रद्धालुओं के इस कदम की चारों ओर सराहना हो रही है।
गरिमामय उपस्थिति व्यासपीठ की पूजा और आरती में राव नरेन्द्र सिंह, बंशी लाल मूंदड़ा, ओम प्रकाश, संदीप, दामोदर, शिव प्रकाश, अशोक और दिलीप मूंदड़ा सहित पूरे मूंदड़ा परिवार ने भाग लिया। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह जाड़ावत, उद्योगपति महेश लड्ढा सहित क्षेत्र के सैकड़ों गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। पंडित अशोक व्यास ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया। गुरुवार को कथा का विधि-विधान के साथ समापन होगा।