ग्रामीणों ने लोक देवता घास भैरू की पूजा-अर्चना कर अच्छी वर्षा, भरपूर फसल और रोगों से रक्षा की प्रार्थना की।
चौरु। उनियारा उपखंड क्षेत्र के चौरु कस्बे में गुरुवार को लोक आस्था और परंपरा के प्रतीक लोक देवता घास भैरू की भव्य शोभायात्रा (सवारी) श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। ग्रामीणों ने अच्छी वर्षा, भरपूर फसल, सुख-समृद्धि तथा मौसमी बीमारियों और महामारी से बचाव की कामना करते हुए पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की।
बालाजी मंदिर से शुरू हुई भव्य शोभायात्रा
घास भैरू की सवारी का शुभारंभ बड़ के बालाजी मंदिर परिसर से हुआ। शोभायात्रा सूरज घाट बालाजी, कंकाली माता मंदिर, देलवाल परिसर सहित कस्बे के प्रमुख मार्गों से होकर पुनः बालाजी मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई।
पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने घास भैरू की पूजा-अर्चना की, अगरबत्ती जलाई तथा तेल, नारियल और प्रसाद अर्पित किया। महिलाओं ने मंगल गीत गाए, जबकि युवाओं ने घास भैरू को आसन पर विराजमान कर रस्सियों से खींचते हुए जयकारों के साथ सवारी निकाली।
अच्छी वर्षा और रोगों से रक्षा की मान्यता
ग्रामीणों ने बताया कि घास भैरू की सवारी निकालने की परंपरा वर्षों पुरानी है। लोक मान्यता के अनुसार घास भैरू इंद्र देव को प्रसन्न कर क्षेत्र में अच्छी वर्षा कराते हैं, जिससे फसलें लहलहाती हैं और गांव में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
शोभायात्रा के दौरान कई परिवारों ने अपने घरों के मुख्य द्वार पर मिट्टी लगाकर रोगों और महामारी से बचाव की पारंपरिक मान्यता का भी पालन किया।
प्राचीन परंपरा से जुड़ा है आयोजन
ग्रामीणों के अनुसार राजस्थान में घास भैरू की सवारी की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। पहले गांव की खुशहाली, प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा और महामारी की रोकथाम के उद्देश्य से यह आयोजन किया जाता था।
आयोजन के दौरान गांव के विभिन्न स्थानों पर औषधीय जड़ी-बूटियों और आयुर्वेदिक वृक्षों की पत्तियों से मेखलाएं बांधी जाती थीं, जिनके नीचे से घास भैरू की सवारी और ग्रामीण गुजरते थे। मान्यता है कि इससे मौसमी रोगों से सुरक्षा मिलती है।
गांव की सुख-समृद्धि का प्रतीक हैं घास भैरू
घास भैरू एक बड़े पत्थर के स्वरूप में स्थापित होते हैं, जिन्हें लकड़ी के आधार पर रखकर ग्रामीण सामूहिक रूप से पूरे गांव में भ्रमण कराते हैं। गांव की सीमा पर विशेष पूजा-अर्चना के बाद क्षेत्र की खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य और भरपूर वर्षा की कामना की जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब वर्षा कम होती है या बादल नहीं बरसते, तब पूरे गांव के लोग एकजुट होकर घास भैरू की सवारी निकालते हैं और अच्छी बारिश, भरपूर फसल तथा क्षेत्रवासियों के सुख-समृद्ध जीवन की प्रार्थना करते हैं।
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Tonk, Rajasthan
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