परी बुआ किन्नर के नेतृत्व में श्रद्धालुओं के लिए भोजन, विश्राम और चिकित्सा सुविधा की विशेष व्यवस्था की गई।
नदबई। विश्व प्रसिद्ध गोवर्धन मुड़िया पूर्णिमा मेले के अवसर पर गोवर्धन परिक्रमा के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं की सेवा हेतु नदबई कस्बे में किन्नर समाज की ओर से सात दिवसीय विशाल भंडारे का शुभारंभ किया गया। परी बुआ किन्नर के नेतृत्व में शुरू हुए इस सेवा अभियान में परिक्रमार्थियों के लिए भोजन, विश्राम और चिकित्सा सुविधाओं की विशेष व्यवस्था की गई है।
उत्तर प्रदेश के गोवर्धन में 22 जुलाई से प्रारंभ हुआ विश्व प्रसिद्ध मुड़िया पूर्णिमा मेला 29 जुलाई तक चलेगा। ब्रज क्षेत्र से जुड़े नदबई कस्बे से होकर हर वर्ष हिंडौन, करौली, दौसा, सवाई माधोपुर, भरतपुर सहित कई जिलों के हजारों श्रद्धालु पैदल गोवर्धन परिक्रमा के लिए रवाना होते हैं। श्रद्धालुओं की सेवा के लिए कस्बे में लगभग 100 स्थानों पर भंडारे, विश्राम स्थल और चिकित्सा शिविर संचालित किए जा रहे हैं।
परी बुआ किन्नर के नेतृत्व में शुरू हुई सेवा
भंडारे के शुभारंभ के दौरान भगवान गिरिराज महाराज के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। किन्नर समाज ने श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा एवं सम्मान के साथ स्वागत किया।
परी बुआ किन्नर ने बताया कि उनकी शिष्याएं सोनिया और नेहा भी इस सेवा अभियान में पूरी निष्ठा से सहयोग कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल भोजन कराना नहीं, बल्कि दूर-दूर से आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को अपनापन, सम्मान और सेवा का अनुभव कराना है।
रोजाना मिलेगा अलग-अलग व्यंजनों का प्रसाद
भंडारे में सातों दिन श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन अलग-अलग प्रकार के व्यंजनों का प्रसाद तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही थके हुए परिक्रमार्थियों के लिए अलग से विश्राम स्थल बनाया गया है। बारिश के मौसम को देखते हुए पूरे परिसर में वाटरप्रूफ टेंट लगाए गए हैं, ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े। आवश्यकता पड़ने पर मेडिकल सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।
किन्नर समाज ने कहा कि गोवर्धन परिक्रमा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और भक्ति का महापर्व है। ऐसे अवसर पर सेवा करने का सौभाग्य भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा है।
क्या है मुड़िया पूर्णिमा मेले की परंपरा
गोवर्धन में आयोजित होने वाले मुड़िया पूर्णिमा मेले की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है। मान्यता के अनुसार गौड़ीय संप्रदाय के महान संत रूप सनातन गोस्वामी प्रतिदिन गिरिराज महाराज की परिक्रमा करते थे। वृद्धावस्था में जब उनके लिए परिक्रमा करना कठिन हो गया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें स्वप्न में दर्शन देकर गिरिराज जी की एक पवित्र शिला प्रदान की और उसकी चार परिक्रमा करने का निर्देश दिया।
बाद में उनके ब्रह्मलीन होने पर शिष्यों ने शोक स्वरूप मुंडन कर गोवर्धन की परिक्रमा की। तभी से यह परंपरा मुड़िया पूर्णिमा के रूप में प्रचलित हुई, जो आज विश्व प्रसिद्ध मेले का स्वरूप ले चुकी है। हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु गिरिराज महाराज की परिक्रमा कर आस्था और सेवा का संदेश देते हैं।
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Bharatpur, Rajasthan
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