उपजाऊ कृषि भूमि और आबादी क्षेत्र से नहर निकालने के प्रस्ताव का किसानों ने विरोध किया, जिला कलेक्टर को ज्ञापन देने का निर्णय।
सूरौठ। क्षेत्र के चिनायटा गांव स्थित चामुंडा मंदिर परिसर में बुधवार को किसानों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में चंबल-पार्वती ईस्टर्न राजस्थान नहर परियोजना के तहत ईसरदा बांध से बंध बारैठा तक प्रस्तावित नहर के वर्तमान सर्वे एवं अलाइनमेंट का सर्वसम्मति से विरोध किया गया। किसानों ने नहर का अलाइनमेंट बदलने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया।
बैठक की अध्यक्षता राम भरोसी ढिंढोरा ने की। इस दौरान किसानों ने कहा कि प्रस्तावित नहर का वर्तमान मार्ग घनी आबादी एवं उपजाऊ कृषि भूमि के बीच से होकर गुजर रहा है, जिससे किसानों को भारी नुकसान होगा।
जिला कलेक्टर को सौंपेंगे ज्ञापन
खेत बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक गोपाल सिंह डागुर ने बताया कि बैठक में निर्णय लिया गया कि जल्द ही किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेगा। इसके बाद किसान जयपुर जाकर राज्य के सिंचाई मंत्री से भी मुलाकात करेंगे।
उन्होंने बताया कि किसानों की मांग है कि नहर का सर्वे बदलकर इसे आबादी और उपजाऊ कृषि भूमि के बजाय चारागाह भूमि से निकाला जाए, ताकि किसानों की जमीन और आजीविका सुरक्षित रह सके।
भूमिहीन होने का जताया डर
बैठक में किसानों और वक्ताओं ने कहा कि यदि वर्तमान सर्वे के अनुसार नहर का निर्माण किया गया तो अनेक किसानों की उपजाऊ भूमि प्रभावित होगी। इससे कई किसान भूमिहीन हो जाएंगे और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
किसानों ने सरकार से जनहित में प्रस्तावित अलाइनमेंट की पुनः समीक्षा कर वैकल्पिक मार्ग निर्धारित करने की मांग की।
कई गांवों के किसान रहे मौजूद
बैठक में चिनायटा, खेड़ी हैवत, राराशाहपुर, शेरपुर, दुर्गसी सहित आसपास के कई गांवों के किसान शामिल हुए।
इस अवसर पर खेत बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक गोपाल सिंह डागुर, चौबीसा जाट समाज के महामंत्री तेज सिंह डागुर, पूर्व चौबीसा अध्यक्ष विष्णु डागुर, रमेशचंद्र, मोरध्वज पहलवान, ब्रह्मानंद शर्मा, चरण सिंह, भीम सिंह, बाबूलाल, रामधन, रामेश्वर, नंदराम, परशुराम, हरचंद, विक्रम सहित बड़ी संख्या में किसानों ने अपने विचार रखे और विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।
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Karauli, Rajasthan
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