गोविंद गुरु के नेतृत्व में हुए आंदोलन और 17 नवंबर 1913 के जनजातीय बलिदान को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की उठाई मांग
भीलवाड़ा। मानगढ़ की पहाड़ी पर जनजातीय वीरों के ऐतिहासिक बलिदान को राष्ट्रीय सम्मान दिलाने के लिए वनवासी कल्याण परिषद ने आवाज बुलंद की है। परिषद ने मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने, ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने और स्थल का समुचित विकास कराने की मांग को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया है।
इस संबंध में गुरुवार को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राजस्थान के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम अतिरिक्त जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। परिषद का कहना है कि गोविंद गुरु के नेतृत्व में हुए आंदोलन और 17 नवंबर 1913 को हुए जनजातीय नरसंहार की गाथा को देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में उचित स्थान मिलना चाहिए।
गोविंद गुरु के नेतृत्व में भगत आंदोलन ने जगाई चेतना
वनवासी कल्याण परिषद के जिला उपाध्यक्ष कैलाश सोनी ने बताया कि ज्ञापन में मानगढ़ धाम को अविलंब राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। गोविंद गुरु के नेतृत्व में संचालित भगत आंदोलन ने जनजातीय समाज में सामाजिक सुधार, स्वाभिमान, जागृति और राष्ट्रीय चेतना का संचार किया।
17 नवंबर 1913 को मानगढ़ पहाड़ी पर अंग्रेजी शासन की गोलीबारी में बड़ी संख्या में जनजातीय महिला, पुरुष और बाल आंदोलनकारियों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का महत्वपूर्ण और मार्मिक अध्याय है।
सामंती शोषण और औपनिवेशिक अन्याय के विरोध का प्रतीक है भगत आंदोलन
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि भगत आंदोलन जनजातीय समाज की अस्मिता की रक्षा, सामंती शोषण और अन्यायपूर्ण औपनिवेशिक व्यवस्था के विरोध का प्रतीक रहा है। मानगढ़ का बलिदान केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित देश के जनजातीय समाज की साझा ऐतिहासिक विरासत है।
परिषद के अनुसार, इस बलिदान ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता की चेतना को प्रखर किया। ऐसे ऐतिहासिक स्थल को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देकर भावी पीढ़ियों तक जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान और संघर्ष की गाथा पहुंचाई जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के मानगढ़ दौरे का किया उल्लेख
ज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 1 नवंबर 2022 को मानगढ़ धाम की यात्रा का भी उल्लेख किया गया। परिषद ने कहा कि प्रधानमंत्री ने मानगढ़ को राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के वीर, देशभक्त एवं स्वाभिमानी समाज की साझा राष्ट्रीय विरासत के रूप में रेखांकित किया था।
इसके साथ ही ज्ञापन में राष्ट्रपति के 4 अक्टूबर 2024 को मानगढ़ धाम पहुंचने और जनजातीय बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का उल्लेख भी किया गया।
ज्ञापन सौंपने के दौरान परिषद के पदाधिकारी रहे मौजूद
इस दौरान वनवासी कल्याण परिषद के नगरी प्रमुख रामप्रकाश अग्रवाल, दिवाकर जावा, पदम जैन, कैलाश नंदावत, ज्ञानचंद जैन, रूपलाल अजमेरा, कमल गोखरू, कन्हैयालाल मूंदड़ा, ओमप्रकाश गंदोडिया, तरुणा शर्मा, स्नेहलता, ऊषा अग्रवाल, अंजना तोषनीवाल, दिनेश विजयवर्गीय, सत्यनारायण सोमानी, भागचंद बाहेती, बाबूलाल शर्मा और महेश खंडेलवाल सहित परिषद के पदाधिकारी मौजूद रहे।
परिषद ने मांग की कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देकर जनजातीय बलिदान की ऐतिहासिक विरासत का संरक्षण किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस संघर्ष और योगदान से परिचित हो सकें।
यह भी पढ़ें:
Bhilwara, Rajasthan
Aawaz Aapki News WhatsApp चैनल से जुड़ें:
सबसे तेज़ और ताज़ा खबरें सीधे अपने व्हाट्सएप पर पाएं।