भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर जहाँ पूरी दुनिया में श्रमिकों के अधिकारों की बात हो रही थी, वहीं वस्त्रनगरी भीलवाड़ा के रीको फेज-4 स्थित ‘अमृत स्पिनर्स प्राइवेट लिमिटेड’ में एक दुखद घटना ने औद्योगिक क्षेत्र में तनाव पैदा कर दिया। नाइट शिफ्ट की ड्यूटी कर बाहर निकले एक 42 वर्षीय श्रमिक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद गुस्साए मजदूरों ने फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और शव को गेट पर रखकर टायर जलाकर उग्र प्रदर्शन किया।
क्या है पूरा घटनाक्रम? मृतक की पहचान घनश्याम वैष्णव (42) के रूप में हुई है, जो मूल रूप से मध्य प्रदेश के उज्जैन (पेटलावद) का रहने वाला था। घनश्याम वर्तमान में भीलवाड़ा के पटेल नगर में किराए पर रहकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। जानकारी के अनुसार, गुरुवार रात वह नाइट ड्यूटी पर आया था। शुक्रवार सुबह जैसे ही वह ड्यूटी खत्म कर फैक्ट्री से बाहर निकला, उसे अचानक पेट में तेज दर्द हुआ और कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया।
मुआवजे को लेकर अड़े श्रमिक, प्रबंधन पर संवेदनहीनता का आरोप श्रमिक की मौत की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में मजदूर इकट्ठा हो गए और फैक्ट्री का काम ठप कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने फैक्ट्री गेट पर शव रखकर टायर जलाए और नारेबाजी की। मजदूरों का आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन ने घटना के बाद संवेदनहीनता दिखाई। श्रमिक नेता बबलू ठूमियां ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री मालिक को बार-बार फोन करने के बावजूद उन्होंने ‘बिजी होने’ की बात कहकर बात करने से मना कर दिया। मजदूरों ने मृतक के परिवार के लिए 15 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की।
PF और ESI न होने पर उठे सवाल प्रदर्शन के दौरान यह बात भी सामने आई कि फैक्ट्री में कई मजदूरों का पीएफ (PF) और ईएसआई (ESI) नहीं काटा जाता है। यदि यह लाभ मिलता, तो मृतक के परिवार को सरकारी सहायता मिल सकती थी। घनश्याम के पीछे उसकी पत्नी और एक 12 साल का बेटा है, जिनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय है।
समझाइश के बाद खुला मामला घटना की सूचना मिलते ही प्रताप नगर थाना पुलिस मौके पर पहुँची। घंटों चले हंगामे और पुलिस की मध्यस्थता में हुई वार्ता के बाद प्रबंधन और प्रदर्शनकारियों के बीच मुआवजे की राशि पर सहमति बनी। इसके बाद ही पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवाया। इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में श्रमिकों की सुरक्षा और उनके वैधानिक अधिकारों (PF/ESI) की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।