प्रयागराज में बाढ़ से हाहाकार, टोंस-लूनी नदी उफान पर; आधा दर्जन गांव जलमग्न


सतपुरा समेत कई गांवों का संपर्क कटा, सड़कें टूटीं और दर्जनों कच्चे मकान गिरे; ग्रामीणों ने राहत सामग्री और नाव की मांग की।

प्रयागराज। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण प्रयागराज के सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा से सटे टोंस नदी क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने से ग्राम पंचायत सतपुरा समेत आसपास के कई गांवों में पानी भर गया है। ग्रामीणों के अनुसार पिछले तीन दिनों से मुख्य संपर्क मार्ग जलमग्न होने के कारण गांव का आवागमन प्रभावित है और लोग जरूरी कामों के लिए भी परेशानी झेल रहे हैं।

टोंस (टमस) और लूनी नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी के बाद चाकघाट-चंदपुर-पटिवार मार्ग पर बने नाले में करीब 15 फीट से अधिक पानी भरने की बात सामने आई है। इससे सतपुरा, पटिवार, लालापुरवा, पड़ीवर सहित आसपास के आधा दर्जन गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया है।

तीन दिन से टापू बना सतपुरा गांव

ग्रामीणों के मुताबिक बाढ़ के पानी के कारण सतपुरा गांव पिछले तीन दिनों से लगभग टापू की स्थिति में है। गांव को जोड़ने वाले प्रमुख रास्ते पर पानी भरने से आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। आवश्यक सामान लेने, इलाज या अन्य जरूरी कार्यों के लिए बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है।

संगम नगरी प्रयागराज में गंगा और यमुना के साथ टोंस नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ने से कछारी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों के अनुसार नदी के जलस्तर में पिछले 24 घंटे में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

दर्जनों घरों को नुकसान, परिवार खुले आसमान के नीचे

भारी बारिश और जलभराव के कारण सतपुरा एवं आसपास के गांवों में कई कच्चे मकानों के गिरने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार पानी घरों में प्रवेश करने से अनाज, कपड़े और बच्चों की किताब-कॉपियां सहित घरेलू सामान भी प्रभावित हुआ है।

कुछ प्रभावित परिवारों को खुले आसमान के नीचे रहने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में खाने-पीने की सामग्री और दवाइयों की भी आवश्यकता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित परिवारों तक तत्काल राहत सामग्री पहुंचाने और जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करने की मांग की है।

पीडब्ल्यूडी सड़क धंसी, जोखिम के बीच आवागमन

बाढ़ के पानी के तेज बहाव से पीडब्ल्यूडी की गढ़ही-पटिवार सड़क के क्षतिग्रस्त होने की भी जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया है।

इसके बावजूद जरूरी कार्यों के लिए कुछ लोग इसी रास्ते से आवागमन करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि तेज बहाव और क्षतिग्रस्त सड़क के कारण किसी समय गंभीर हादसा हो सकता है।

उन्होंने प्रशासन से क्षतिग्रस्त मार्ग पर तत्काल सुरक्षा व्यवस्था करने तथा आवागमन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है।

ग्राम प्रधान ने प्रशासन से मदद नहीं मिलने का लगाया आरोप

ग्राम पंचायत सतपुरा के ग्राम प्रधान (प्रशासक) प्रदीप कुमार मिश्रा ने बताया कि गांव में बाढ़ की स्थिति गंभीर है। उनके अनुसार पिछले तीन दिनों से गांव का संपर्क प्रभावित है और अभी तक प्रशासन की ओर से अपेक्षित मदद नहीं पहुंची है।

उन्होंने आरोप लगाया कि गांव में नाव और राहत सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई है। ग्राम प्रधान के अनुसार अधिकारियों को कई बार स्थिति की जानकारी दी गई, लेकिन प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो सकी।

ग्रामीणों ने नाव और राहत शिविर की मांग की

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल बाढ़ राहत शिविर शुरू करने की मांग की है। इसके साथ ही प्रभावित गांवों में नाव उपलब्ध कराने, भोजन के पैकेट, तिरपाल, पीने का पानी और आवश्यक दवाइयां पहुंचाने की मांग की गई है।

ग्रामीणों ने क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत तथा पानी कम होने तक प्रभावित मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों का कहना है कि लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर के बीच उन्हें प्रशासनिक सहायता का इंतजार है। ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थिति का तत्काल मौके पर जायजा लेकर प्रभावित परिवारों को आवश्यक राहत उपलब्ध कराने की अपील की है।

यह भी पढ़ें:


Aawaz Aapki News WhatsApp चैनल से जुड़ें:

सबसे तेज़ और ताज़ा खबरें सीधे अपने व्हाट्सएप पर पाएं।

WhatsApp अभी जुड़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *