राजपरिवार ने मण्डेला को बताया “शाहपुरा का कोहेनूर”, नई प्रतिभाओं के लिए वार्षिक ट्रॉफी की हुई घोषणा
शाहपुरा। (मूलचन्द पेसवानी) साहित्य की खुशबू और राजसी परंपराओं के संगम का गवाह बना शाहपुरा का ऐतिहासिक रैतिया पैलेस। अवसर था, केंद्रीय साहित्य अकादमी से सम्मानित प्रख्यात साहित्यकार डॉ. कैलाश मण्डेला के नागरिक अभिनंदन का। शाहपुरा राजपरिवार द्वारा आयोजित इस गरिमामय समारोह में न केवल साहित्य का सम्मान हुआ, बल्कि भविष्य की प्रतिभाओं के लिए प्रोत्साहन के नए द्वार भी खुले। आजादी के बाद यह पहला मौका था जब रैतिया पैलेस के विशिष्ट हॉल में इस स्तर का कोई साहित्यिक सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
मण्डेला हैं “शाहपुरा के कोहेनूर” समारोह के दौरान राजपरिवार के मुखिया जयसिंह ने डॉ. मण्डेला की साहित्यिक साधना की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने मण्डेला को “शाहपुरा का कोहेनूर” की उपाधि देते हुए कहा कि उनकी लेखनी ने राष्ट्रीय स्तर पर जिले का मान बढ़ाया है। इस अवसर पर जयसिंह ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि अब प्रतिवर्ष क्षेत्र की एक नवोदित साहित्यिक प्रतिभा को ‘डॉ. कैलाश मण्डेला ट्रॉफी’ और नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह कदम स्थानीय युवाओं को लेखन की ओर प्रेरित करने में मील का पत्थर साबित होगा।
सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की उठी मांग अपने संबोधन में डॉ. कैलाश मण्डेला भावुक नजर आए। उन्होंने इस सम्मान के लिए राजपरिवार का आभार जताया, साथ ही शाहपुरा की विलुप्त होती सांस्कृतिक और साहित्यिक धरोहरों पर चिंता भी व्यक्त की। उन्होंने प्रशासन और प्रबुद्धजनों से श्री उम्मेद सार्वजनिक पुस्तकालय को पुनः क्रियाशील करने की पुरजोर मांग रखी। मण्डेला ने जोर देकर कहा कि यदि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ना है, तो इतिहास को पढ़ना और समझना अनिवार्य है।
साहित्यिक छटा और ओजस्वी प्रस्तुतियां कार्यक्रम का संचालन हास्य कवि दिनेश बंटी ने अपने चिरपरिचित अंदाज में किया। साहित्य सृजन कला संगम के अध्यक्ष जयदेव जोशी ने काव्य पाठ से माहौल को साहित्यिक गरिमा प्रदान की। समारोह में डॉ. मण्डेला ने अपनी और लोककवि मोहन मण्डेला की चुनिंदा कृतियां राजपरिवार को भेंट कीं। इस दौरान उन्होंने अपनी ओजस्वी कविताओं और गीतों का पाठ किया, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। आर्य समाज के प्रतिनिधियों ने “सत्यार्थ प्रकाश” की प्रति भेंट कर मण्डेला का स्वागत किया।
विशिष्टजनों की रही मौजूदगी समारोह में आर्य समाज के हीरालाल आर्य, सुनील बेली, तैराकी संघ के संरक्षक नरेश बूलिया, वरिष्ठ नागरिक संघ के राजेंद्र बोहरा, डॉ. हरमल रेबारी, डॉ. सत्यनारायण कुमावत, अभिभाषक दुर्गा लाल राजोरा सहित शिक्षा, समाजसेवा और कला जगत की अनेक हस्तियां मौजूद रहीं। सभी ने एक स्वर में डॉ. मण्डेला के कृतित्व पर शोध करने की आवश्यकता पर बल दिया।