आरटीई भुगतान अटका, निजी स्कूल संचालकों ने आंदोलन की चेतावनी दी


तीन साल से पुनर्भरण लंबित, 7 दिन का अल्टीमेटम; मांगें नहीं मानीं तो कलेक्ट्रेट पर अर्धनग्न धरने की चेतावनी

भीलवाड़ा। आरटीई भुगतान तीन साल से लंबित होने और विभागीय स्तर पर समस्याओं का समाधान नहीं होने से निजी स्कूल संचालकों का आक्रोश सामने आया है। भीलवाड़ा जिला निजी शिक्षण संस्थान के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को 11 सूत्रीय मांग पत्र सौंपकर सात दिन में समस्याओं के समाधान की मांग की।

संगठन ने चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि में मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशभर के गैर-सरकारी स्कूल आंदोलन की राह पकड़ेंगे और कलेक्ट्रेट के सामने अर्धनग्न धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

तीन साल से आरटीई पुनर्भरण भुगतान लंबित

प्रदेश प्रभारी रामेश्वर लाल धाकड़ एवं कानूनी सलाहकार शांतिलाल जैन के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपा गया। संगठन के जिलाध्यक्ष अर्जुन देवलिया ने कहा कि निजी विद्यालय शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन आरटीई के तहत नि:शुल्क पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पिछले तीन वर्षों का पुनर्भरण भुगतान लंबित है।

संगठन के अनुसार भुगतान अटकने से निजी स्कूलों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। विभाग और ट्रेजरी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, जिसके कारण आरटीई बिलों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।

2018 से आरटीई सेल प्रभारी का पद खाली

निजी शिक्षण संस्थान संगठन ने बताया कि जिले में वर्ष 2018 से आरटीई सेल प्रभारी का पद रिक्त है। संगठन के अनुसार इसका असर बजट, आरटीई प्रवेश और मान्यता नवीनीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों पर पड़ रहा है।

संगठन ने पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के वर्ष 2023 से लंबित पुनर्भरण भुगतान सहित आरटीई व्यवस्था से जुड़ी अन्य समस्याओं के तत्काल समाधान की मांग की।

11 सूत्रीय मांग पत्र में ये प्रमुख मांगें

ज्ञापन में पिछले तीन वर्षों से लंबित आरटीई पुनर्भरण बिलों का सात दिन में निस्तारण करने और आरटीई सेल प्रभारी की नियुक्ति की मांग की गई।

इसके अलावा पूर्व-प्राथमिक विद्यार्थियों का लंबित भुगतान जारी करने, नो ड्यूज सर्टिफिकेट के बिना टीसी जारी करने की बाध्यता समाप्त करने, आरटीई पोर्टल की सुविधाओं में सुधार करने तथा पुराना प्रवेश मॉड्यूल बहाल करने की मांग रखी गई।

संगठन ने 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों के आरटीई भुगतान की स्थिति स्पष्ट करने और सत्र समाप्त होने से पहले दोनों किश्तों का शत-प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी की।

वहीं, आरटीई पुस्तकों के लिए प्रति विद्यार्थी 1000 से 2000 रुपए अभिभावकों के खाते में भेजने, निजी विद्यालय संगठनों के सुझाव लेकर नीतियां बनाने और आरटीई की पुरानी, सरल एवं व्यावहारिक प्रवेश प्रक्रिया को पुनः लागू करने की मांग की गई।

सात दिन का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी

निजी स्कूल संचालकों ने सरकार और विभाग से सात दिन के भीतर मांगों पर कार्रवाई करने की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट किया कि तय अवधि में समाधान नहीं होने पर प्रदेशभर के गैर-सरकारी स्कूल आंदोलन करेंगे।

संगठन की ओर से कलेक्ट्रेट के सामने अर्धनग्न धरना-प्रदर्शन की चेतावनी भी दी गई है।

कई निजी स्कूल संचालक रहे मौजूद

ज्ञापन सौंपने के दौरान रामगोपाल शर्मा, एडवोकेट हंसराज यादव, महेश राठौड़, दिनेश छीपा पुर, महेंद्र शर्मा, विजेश पहाड़िया, पंकज दाधीच, देशबंधु दाधीच, विष्णु मारू, अर्पणा सोनी, रामपाल लूणिया, कमलेश गौड़, गोपाल सोनी, निजामुद्दीन, दुर्गा सिंह राठौड़, दिव्या बाबेल, कुमकुम कुलश्रेष्ठ, धीरज जैन, स्वास्तिक चौबे, महावीर सिंह, धनराज शर्मा और दीपक व्यास सहित कई निजी स्कूल संचालक मौजूद रहे।

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