सवाई माधोपुर में न्यायिक कार्यशाला, साइबर अपराध और पोश अधिनियम पर चर्चा


राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में साइबर अपराध, महिलाओं की सुरक्षा, डिजिटल अरेस्ट और न्यायिक प्रक्रियाओं पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।

सवाई माधोपुर। राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी, जोधपुर के तत्वावधान में रविवार को जिला मुख्यालय सवाई माधोपुर में प्रथम त्रैमासिक न्यायिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता राजस्थान उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधिपति इन्द्रजीत सिंह ने की। इसमें सवाई माधोपुर, दौसा और टोंक के जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक अधिकारियों ने भाग लेकर विभिन्न समसामयिक विधिक विषयों पर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर देवेन्द्र दीक्षित (जिला एवं सेशन न्यायाधीश, सवाई माधोपुर), केशव कौशिक (जिला एवं सेशन न्यायाधीश, दौसा) तथा डॉ. सीमा अग्रवाल (जिला एवं सेशन न्यायाधीश, टोंक) सहित बड़ी संख्या में न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।

लैंगिक समानता और महिलाओं की सुरक्षा पर हुई चर्चा

कार्यशाला के प्रथम सत्र में लैंगिक समानता, कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा तथा महिलाओं के साथ भेदभाव और उत्पीड़न की रोकथाम जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-1, लालसोट सुश्री ऋतु चंदानी ने पोश (POSH) अधिनियम, 2013 के प्रावधानों और प्रक्रियाओं की जानकारी देते हुए कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकार एवं गरिमा से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्देशों पर प्रकाश डाला।

वहीं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-2, लालसोट श्रीमती मधु शर्मा ने न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्यवाहियों में लैंगिक संवेदनशीलता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-2, दौसा श्रीमती माध्वी गोस्वामी ने दहेज संबंधी अपराधों के सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक पहलुओं के साथ-साथ सर्वोच्च एवं उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख किया।

डिजिटल अरेस्ट और साइबर अपराधों पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी

द्वितीय सत्र में डिजिटल अरेस्ट, साइबर अपराध, ऑनलाइन धोखाधड़ी, धन वापसी प्रक्रिया तथा NCRP-CFCFRMS की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) पर विस्तार से चर्चा की गई।

टोंक न्यायक्षेत्र की न्यायिक अधिकारी श्रीमती अशिमा माथुर, श्रीमती सबा परवीन कागजी, श्री गजपाल सिंह तथा श्रीमती साधना सिंह ने ऑनलाइन फ्रॉड की शिकायतों, बैंक खातों को फ्रीज करने तथा पीड़ितों को धन वापसी की प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने संबंधित विषयों पर सर्वोच्च एवं उच्च न्यायालयों के विभिन्न न्यायिक दृष्टांतों का भी उल्लेख किया।

इस अवसर पर जिला एवं सेशन न्यायाधीश देवेन्द्र दीक्षित ने बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने और आमजन को जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया।

डिक्री निष्पादन पर साझा किए व्यावहारिक अनुभव

कार्यशाला के अंतिम सत्र में अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश, बौंली श्री विकास नेहरा तथा अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-1, गंगापुर सिटी श्री भरत पुनिया ने धन संबंधी डिक्री के निष्पादन और उससे जुड़ी न्यायिक प्रक्रियाओं पर विस्तार से जानकारी दी।

कार्यशाला के दौरान न्यायिक अधिकारियों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों एवं शंकाओं का समाधान माननीय न्यायाधिपति इन्द्रजीत सिंह ने किया।

रेशमा खान और डॉ. प्रियंका पारीक ने किया संचालन

कार्यक्रम का संचालन अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संख्या-2, गंगापुर सिटी श्रीमती रेशमा खान तथा अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश, सवाई माधोपुर डॉ. प्रियंका पारीक ने किया। अंत में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सवाई माधोपुर श्री मयंक पालीवाल ने सभी अतिथियों एवं न्यायिक अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यशाला के सफल आयोजन में सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

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