बौंली में श्रीमद्भागवत कथा में साध्वी नंदिनी जी ने बताया भक्ति का महत्व


बौंली में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन साध्वी नंदिनी जी महाराज ने नियम, भक्ति और आत्मा-परमात्मा के मिलन का संदेश दिया।

बौंली| बौंली स्थित श्री देवनारायण जी मंदिर के सभागार में आयोजित श्रीमद्भागवत साप्ताहिक कथा के तीसरे दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण का लाभ प्राप्त किया। कथा के दौरान साध्वी नंदिनी जी महाराज, वृंदावन धाम ने व्यास पीठ से भक्तों को नियम, भक्ति और धर्म के महत्व पर विस्तृत रूप से संबोधित किया।

नियम और भक्ति ही आत्मा से परमात्मा के मिलन का सर्वोत्तम साधन

साध्वी नंदिनी जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि भक्तजनों को विचलित होकर कभी भी नियम और भक्ति मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संसार में नियम और भक्ति मार्ग ही आत्मा से परमात्मा के मिलन का सर्वोत्तम साधन है। यदि कोई भक्त पूरी श्रद्धा, विश्वास और नियमित साधना के साथ भगवान का स्मरण करता है तो भगवान एक दिन उसकी पुकार अवश्य सुनते हैं।

उन्होंने कहा कि जीवन में अनेक प्रकार की परिस्थितियाँ आती हैं, लेकिन सच्चा भक्त कभी भी अपने नियम और भक्ति से विचलित नहीं होता। नियमित साधना और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास ही मनुष्य को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है।

धार्मिक एवं मार्मिक प्रसंगों का किया वर्णन

कथा के दौरान साध्वी नंदिनी जी महाराज ने सृष्टि की रचना, मनु-शतरूपा की उत्पत्ति सहित अनेक धार्मिक एवं मार्मिक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने इन प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, आस्था और सनातन संस्कृति के मूल्यों से जुड़ने का संदेश दिया।

कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ कथा का श्रवण किया और व्यास पीठ से दिए गए आध्यात्मिक संदेशों को आत्मसात किया।

भक्ति रस में सराबोर हुए श्रद्धालु

जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ी, श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होते गए। धार्मिक प्रसंगों और मधुर कथा वाचन से वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा के समापन की ओर श्रद्धालु भगवान की भक्ति में भावविभोर होकर नाचने और झूमने लगे, जिससे पूरा सभागार भक्तिमय माहौल से गूंज उठा।

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