नालसा शिक्षा योजना 2026, निःशुल्क विधिक सहायता और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों की विद्यार्थियों को दी जानकारी
सवाई माधोपुर, 08 सितंबर 2026। अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सवाई माधोपुर के तत्वावधान में शहीद कैप्टन रिपुदमन सिंह विधि महाविद्यालय, सवाई माधोपुर में आयोजित शिविर में विद्यार्थियों को नालसा शिक्षा योजना 2026, निःशुल्क विधिक सलाह एवं सहायता सहित विभिन्न महत्वपूर्ण कानूनी एवं व्यवहारिक विषयों की जानकारी दी गई।
साक्षरता के साथ विधिक जानकारी भी जरूरी
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सवाई माधोपुर की सचिव समीक्षा गौतम ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि साक्षरता का अर्थ केवल पढ़ना-लिखना ही नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति के लिए अपने अधिकारों, कर्तव्यों और कानून की जानकारी होना भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि विधिक साक्षरता समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद वर्गों को न्याय तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। साथ ही, उन्होंने विद्यार्थियों से कानूनी जानकारी को केवल अपने तक सीमित नहीं रखने तथा समाज के अन्य लोगों तक भी यह जानकारी पहुंचाने का आह्वान किया।
नालसा शिक्षा योजना 2026 की दी जानकारी
सचिव समीक्षा गौतम ने नालसा शिक्षा योजना 2026 के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना कमजोर वर्गों, वंचित समूहों के बच्चों और दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षा की पहुंच एवं निरंतरता सुनिश्चित करती है।
उन्होंने बताया कि योजना का उद्देश्य कमजोर वर्ग के बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलाना और उनकी पढ़ाई जारी रखने में सहायता करना है। इसके अलावा योजना के तहत छात्रवृत्ति, हॉस्टल सुविधा और मिड डे मील सुविधाएं उपलब्ध करवाने तथा ड्रॉपआउट दर को कम करने के लिए सहायता करने पर भी जोर दिया गया है।
साथ ही, समुदायों में शिक्षा के महत्व के संबंध में जागरूकता फैलाना भी योजना के उद्देश्यों में शामिल है। विद्यार्थियों को योजना से जुड़े इन महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी देकर शिक्षा के अधिकार और उसकी निरंतरता के प्रति जागरूक किया गया।
‘स्ट्रेंजर डेंजर- नो, गो, टेल’ का संदेश
सचिव समीक्षा गौतम ने ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे के तहत ‘स्ट्रेंजर डेंजर- नो, गो, टेल’ यानी अजनबी से सावधान, मना करो, दूर जाओ, बताओ विषय पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों को विद्यालयों में अध्ययनरत अपने परिचित बच्चों को अजनबियों से सावधान रहने के लिए प्रेरित करने की बात कही। साथ ही, किसी अनुचित या असहज स्थिति का सामना होने पर स्पष्ट रूप से ‘नहीं’ कहने, वहां से दूर चले जाने और किसी विश्वसनीय व्यक्ति को तत्काल इसकी जानकारी देने के संबंध में जागरूक किया गया।
हिट एंड रन पीड़ितों के मुआवजे की जानकारी
आयोजित शिविर में असिस्टेंट एलएडीसी अक्षय राजावत ने भी विद्यार्थियों को विभिन्न महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों के संबंध में जानकारी प्रदान की।
उन्होंने हिट एंड रन मोटर दुर्घटना के पीड़ितों को मुआवजा योजना 2022 के बारे में बताया। उन्होंने जानकारी दी कि योजना के तहत अज्ञात वाहन द्वारा हिट एंड रन मोटर दुर्घटना में पीड़ितों अथवा उनके आश्रितों को नियमानुसार मुआवजा एवं सहायता उपलब्ध करवाई जाती है।
अक्षय राजावत ने राजस्थान पीड़ित प्रतिकर योजना के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी अपराध से पीड़ित व्यक्तियों एवं उनके आश्रितों को योजना के तहत नियमानुसार प्रतिकर राशि प्राप्त करने का अधिकार है। पात्र पीड़ित व्यक्ति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से आवश्यक विधिक सहायता भी प्राप्त कर सकते हैं।
पोक्सो एक्ट के प्रावधानों से कराया अवगत
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पोक्सो एक्ट) के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
अक्षय राजावत ने बच्चों को लैंगिक अपराधों से सुरक्षा, अनुचित व्यवहार की पहचान, शिकायत एवं रिपोर्टिंग की आवश्यकता तथा पीड़ित बच्चे की पहचान और गरिमा की सुरक्षा के संबंध में जानकारी प्रदान की।
उन्होंने बताया कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का लैंगिक दुर्व्यवहार होने पर मामले को छिपाने के बजाय तत्काल अभिभावक, शिक्षक, पुलिस अथवा सक्षम प्राधिकारी को इसकी सूचना दी जानी चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कानून का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षा प्रदान करना और उन्हें भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना है।
विद्यार्थियों को विधिक जागरूकता की भूमिका समझाई
सचिव समीक्षा गौतम ने विद्यार्थियों से कहा कि विधि महाविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थी भविष्य में न्याय व्यवस्था एवं समाज के महत्वपूर्ण अंग बनेंगे। इसलिए उन्हें न केवल स्वयं कानून की जानकारी रखनी चाहिए, बल्कि आमजन, महिलाओं, बच्चों, दुर्घटना पीड़ितों और समाज के कमजोर वर्गों को भी उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि कानून की जानकारी व्यक्ति को अपने अधिकारों की प्रभावी ढंग से रक्षा करने में सक्षम बनाती है। विधिक जागरूकता के माध्यम से समाज में न्याय, समानता और सुरक्षा की भावना को मजबूत किया जा सकता है।
इस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर आयोजित इस विधिक जागरूकता शिविर में विद्यार्थियों को शिक्षा, विधिक सहायता, पीड़ितों के अधिकार, बच्चों की सुरक्षा और कानून से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी प्रदान की गई।
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