समान वेतन और गृह जनपद में तैनाती की मांग को लेकर संविदा एएनएम का कार्य बहिष्कार, लखनऊ कूच की चेतावनी।
प्रयागराज। राजदेव द्विवेदी। संविदा एएनएम का कार्य बहिष्कार शुरू होने से शंकरगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित पूरे ब्लॉक क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की बात सामने आई है। संविदा एएनएम ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर काम बंद कर दिया है। इससे टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाएं, परिवार नियोजन और घर-घर सर्वे जैसे कार्य प्रभावित होने की जानकारी दी गई है। 26 सितंबर को शंकरगढ़ सीएचसी में संविदा एएनएम ने अधीक्षक को ज्ञापन देकर अपनी मांगों के शीघ्र समाधान की मांग भी की थी।
सीएचसी परिसर में एकत्र होकर जताया विरोध
शनिवार को शंकरगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में संविदा एएनएम एकत्र हुईं और अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया। एएनएम का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से संविदा के आधार पर कम वेतन में स्वास्थ्य सेवाएं दे रही हैं।
संविदा एएनएम ने मांग की कि उन्हें स्थायी एएनएम के बराबर वेतन दिया जाए। इसके साथ ही वर्षों से अपने गृह जनपद से दूर तैनात संविदा एएनएम को गृह जनपद में तैनाती देने की मांग भी उठाई गई।
एएनएम का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर लंबे समय से आश्वासन मिलते रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ है।
समान वेतन और गृह जनपद में तैनाती की मांग
संविदा एएनएम की प्रमुख मांगों में समान कार्य के लिए समान वेतन, नियमितीकरण और गृह जनपद में स्थानांतरण शामिल है। प्रदेश स्तर पर भी संविदा एएनएम संगठन इन मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है। 22 सितंबर को लखनऊ के इको गार्डन में हुए प्रदर्शन में संविदा एएनएम ने समान कार्य-समान वेतन, नियमितीकरण और गृह जनपद स्थानांतरण सहित कई मांगें उठाई थीं।
संविदा एएनएम का कहना है कि वर्षों से स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं देने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान वेतन और सेवा संबंधी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इसी को लेकर अब उन्होंने कार्य बहिष्कार का रास्ता अपनाया है।
टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं की सेवाएं प्रभावित होने का दावा
कार्य बहिष्कार के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाले टीकाकरण अभियान के प्रभावित होने की बात कही गई है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं से संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं और परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
संविदा एएनएम का कहना है कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है और लंबे समय तक कार्य बहिष्कार रहने पर इसका सीधा असर आम लोगों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ सकता है।
शंकरगढ़ में 26 सितंबर को संविदा एएनएम द्वारा दिए गए ज्ञापन में भी यह कहा गया था कि कार्य बहिष्कार लंबा चलने पर ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण, प्रसव और अन्य स्वास्थ्य कार्य प्रभावित होंगे।
लखनऊ कूच और निदेशालय घेराव की चेतावनी
संविदा एएनएम ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो जिले की सभी संविदा एएनएम लखनऊ कूच करेंगी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के निदेशालय का घेराव कर आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कही गई है।
एएनएम ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगों में समान कार्य का समान वेतन, नियमितीकरण और गृह जनपद स्थानांतरण प्रमुख रूप से शामिल हैं।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में एनएचएम संविदा कर्मचारियों की ओर से भी नियमितीकरण, समान कार्य-समान वेतन और स्थानांतरण नीति सहित अन्य मांगों को लेकर आंदोलन की चेतावनियां सामने आई हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर को लेकर ग्रामीणों की चिंता
संविदा एएनएम के कार्य बहिष्कार से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है। खास तौर पर टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं से जुड़ी सेवाओं में एएनएम की भूमिका महत्वपूर्ण होने के कारण लंबे समय तक आंदोलन चलने पर ग्रामीण क्षेत्रों में परेशानी बढ़ सकती है।
अब निगाह इस बात पर है कि संविदा एएनएम की मांगों को लेकर शासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्या कदम उठाया जाता है और कार्य बहिष्कार कब तक जारी रहता है।
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