खबर प्रकाशित होने के बाद सीएचसी की खिड़कियों और दीवारों पर उगे पेड़ काटे गए, लेकिन एंबुलेंस और एक्स-रे व्यवस्था को लेकर सवाल कायम हैं।
प्रयागराज। राजदेव द्विवेदी। शंकरगढ़ सीएचसी की खिड़कियों पर उगे पेड़ काटे जाने के बाद अस्पताल की व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जगी है। इससे पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की जर्जर दीवारों और खिड़कियों पर पीपल सहित अन्य पेड़ उगने की तस्वीरें सामने आई थीं। खबर प्रकाशित होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मजदूर लगाकर खिड़कियों और दीवारों पर उगे पेड़ों को कटवा दिया।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल पेड़ काट देने से अस्पताल की मूल समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उनका दावा है कि सीएचसी की एंबुलेंस को अभी भी धक्का देकर स्टार्ट करना पड़ता है और एक्स-रे मशीन भी लंबे समय से उपयोग में नहीं है। प्रयागराज जिला प्रशासन की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी में सीएचसी स्तर पर एक्स-रे और 108/102 एंबुलेंस जैसी सुविधाएं शामिल बताई गई हैं।
खबर के बाद खिड़कियों और दीवारों से काटे गए पेड़
सीएचसी की खिड़कियों और दीवारों पर पीपल आदि के पेड़ उग आने की समस्या सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने इन्हें हटाने की कार्रवाई की। मजदूर लगाकर पेड़ों को काटा गया और खिड़कियों तथा दीवारों को साफ कराया गया।
स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई को जरूरी कदम बताया, लेकिन साथ ही अस्पताल की अन्य व्यवस्थाओं में भी सुधार की मांग की है।
एंबुलेंस को लेकर स्थानीय लोगों ने उठाया सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल की एंबुलेंस को लेकर समस्या अभी भी बनी हुई है। उनका दावा है कि एंबुलेंस को धक्का देकर स्टार्ट करना पड़ता है।
लोगों का सवाल है कि यदि किसी गंभीर मरीज या गर्भवती महिला को तत्काल दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़े और एंबुलेंस समय पर शुरू न हो तो मरीज और उसके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
प्रयागराज जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार जिले में 108 एंबुलेंस सेवा उपलब्ध है और 102 सेवा गर्भवती महिलाओं तथा बच्चों के लिए भी संचालित की जाती है।
एक्स-रे मशीन को लेकर भी सवाल
स्थानीय लोगों ने शंकरगढ़ सीएचसी में एक्स-रे सुविधा को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एक्स-रे मशीन लंबे समय से काम नहीं कर रही है और मरीजों को जांच के लिए बाहर जाना पड़ रहा है।
इस मामले में स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित स्वास्थ्य अधिकारी मशीन की वास्तविक स्थिति की जांच कराएं और यदि मशीन खराब है तो उसे जल्द ठीक कराया जाए या वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मेंटेनेंस व्यवस्था पर भी उठे सवाल
अस्पताल की खिड़कियों और दीवारों पर पेड़ उगने की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों ने रखरखाव व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर भवन का निरीक्षण और रखरखाव होता तो खिड़कियों और दीवारों पर पेड़ उगने जैसी स्थिति नहीं बनती।
वहीं, अस्पताल में हाल ही में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निरीक्षण की खबर भी सामने आई थी। 9 सितंबर को हुए निरीक्षण में स्वास्थ्य सेवाओं, साफ-सफाई, प्रयोगशाला, प्रसव कक्ष और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया था।
स्थानीय लोगों ने कहा- पेड़ कटना शुरुआत, बाकी समस्याएं भी दूर हों
स्थानीय लोगों ने कहा कि अस्पताल की खिड़कियों और दीवारों से पेड़ हटना जरूरी था, लेकिन इससे अस्पताल की दूसरी समस्याएं खत्म नहीं होतीं। लोगों की मांग है कि एंबुलेंस और एक्स-रे व्यवस्था की भी जांच कराकर उन्हें सुचारु कराया जाए।
लोगों का कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले मरीजों को जरूरी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर मिलनी चाहिए, ताकि उन्हें छोटी-बड़ी जांच या आपात स्थिति में अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।
अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर हैं कि पेड़ हटाने के बाद अस्पताल की अन्य व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जाती है या नहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल के भवन और स्वास्थ्य सुविधाओं की नियमित निगरानी जरूरी है, ताकि समस्याएं गंभीर होने से पहले ही उनका समाधान हो सके।
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