भागवत रसधारा में डूबा विजयपुर: कथा समापन पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, संत दिग्विजय राम ने दिया जीवन का सार

“आत्मा अजर-अमर है, मृत्यु निश्चित है तो भय कैसा” — श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन गूंजे…