संतों के सत्संग और रामचरितमानस की व्याख्या से भक्तिमय हुआ रामधाम, नित्य गीता प्रवचन में ज्ञान-भक्ति की धारा जारी।
भीलवाड़ा। शहर के चित्तौड़ रोड स्थित रामधाम आश्रम में बुधवार को भक्तिशिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास महाराज की जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। श्री रामधाम रामायण मंडल ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित समारोह में संतों के सत्संग, रामचरितमानस की प्रेरक व्याख्या, महाआरती और महाप्रसाद के बीच आश्रम परिसर राममय नजर आया।
श्रावण शुक्ल सप्तमी के पावन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भीलवाड़ा शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। संतों के प्रवचनों के दौरान रामचरितमानस, नाम-स्मरण और सत्संग की महिमा पर प्रकाश डाला गया। पूरे कार्यक्रम में जय श्रीराम और रामधाम सरकार की जय के जयकारे गूंजते रहे।
नाम-जप और सत्संग को बताया सरल साधना
कार्यक्रम में स्वामी आनंदस्वरूप सरस्वती (शिवपुरी) ने कहा कि कलियुग में नाम-जप और सत्संग मनुष्य के लिए सरल एवं प्रभावी साधना हैं। उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के माध्यम से भक्ति का सहज मार्ग प्रस्तुत किया, जो आज के तनावपूर्ण जीवन में मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम बन सकता है।
सत्संग से दूर होता है मोह और अज्ञान
शंकर मठ, आबू पर्वत के स्वामी हरितीर्थ महाराज ने रामचरितमानस के संदेश की व्याख्या करते हुए सत्संग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सत्संग के माध्यम से मनुष्य को आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से संतों के सान्निध्य और सत्संग का लाभ लेने का आह्वान किया।
रामचरितमानस आदर्श जीवन की आचार संहिता: महंत मोहन शरण
निंबार्क आश्रम, गांधीनगर के महंत मोहन शरण ने गोस्वामी तुलसीदास के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रामचरितमानस केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आदर्श मानवीय जीवन की आचार संहिता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को तुलसीदास द्वारा बताए गए भक्ति मार्ग पर चलने तथा जीवन में सदाचार, सेवा और आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का संकल्प दिलाया।
संतों के सान्निध्य से सात्विकता का संचार
हाथी भाटा धाम के महंत संतदास महाराज ने संत संगति और सत्संग की महत्ता बताते हुए कहा कि महापुरुषों का सान्निध्य मनुष्य के भीतर सकारात्मक विचारों और सात्विक भावनाओं को विकसित करने में सहायक होता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से संतों के विचारों को सुनने के साथ-साथ उन्हें अपने जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
चातुर्मास में प्रतिदिन हो रहे गीता प्रवचन
कार्यक्रम के दौरान रामधाम आश्रम में चल रहे चातुर्मास की विशेष महत्ता पर भी प्रकाश डाला गया। ट्रस्ट पदाधिकारियों ने बताया कि स्वामी हरितीर्थ महाराज के सान्निध्य में प्रतिदिन सुबह 9 से 10 बजे तक नित्य गीता प्रवचन आयोजित किए जा रहे हैं।
इन प्रवचनों में गीता के ज्ञान, कर्म और भक्ति योग का सरल एवं व्यावहारिक विवेचन किया जा रहा है। ट्रस्ट ने शहरवासियों से चातुर्मास के दौरान इन धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का लाभ लेने का आह्वान किया।
महाआरती और महाप्रसाद के साथ हुआ समापन
समारोह की व्यवस्थाओं का संचालन ट्रस्ट अध्यक्ष सूर्यप्रकाश मानसिंहका एवं उपाध्यक्ष हेमंत मानसिंहका ने किया। ट्रस्ट के प्रवक्ता गोविंद सोडानी ने बताया कि सत्संग के समापन पर संतों की महाआरती की गई तथा श्रद्धालुओं को महाप्रसाद वितरित किया गया।
महाआरती के दौरान आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण कर धार्मिक आयोजन का लाभ लिया।
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