नौगांवा में चतुर्भुज रूप में सजे सांवरिया सेठ

शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण कर भक्तों को दिए साक्षात भगवान विष्णु के दर्शन

भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। नौगांवा सांवरिया सेठ मंदिर में इन दिनों अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के पावन अवसर पर भक्ति और दिव्यता का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। धार्मिक अनुष्ठानों के तहत ठाकुर जी का प्रतिदिन अलौकिक और नित-नूतन श्रृंगार किया जा रहा है।

इसी कड़ी में मंगलवार को सांवरिया सेठ का भगवान विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप में बेहद भव्य और मनमोहक श्रृंगार रचा गया, जिसके दर्शन पाकर भक्त भाव-विभोर हो उठे।

अलसुबह मंगला आरती के बाद ठाकुर जी को साक्षात हरि विष्णु का रूप देते हुए उनकी चार भुजाएं सजाई गईं। भगवान के ऊपरी हाथों में दिव्य शंख और सुदर्शन चक्र का प्रतीक सुशोभित था, तो वहीं निचले हाथों में उन्होंने सोने की भव्य कौमोदकी गदा और अत्यंत सुंदर गुलाबी कमल का पुष्प धारण किया हुआ था।

ठाकुर जी को विशेष रूप से चमकीले पीले रंग की धोती (पीतांबर) धारण कराई गई। साथ ही हरे व गुलाबी रंग के पटके पर की गई गोटा-पत्ती और जरी की नक्काशी भगवान की आभा को और बढ़ा रही थी। शीश पर सूर्य की किरणों जैसी चमक बिखेरता स्वर्ण मुकुट और उसके ऊपर लगा कलात्मक छत्र भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहा। गले में वैजयंती माला और बाहों में बाजूबंद की कलात्मकता देखते ही बन रही थी।

भगवान के विग्रह के पीछे सजाया गया आसमानी रंग का विशेष पर्दा और उसकी रंग-बिरंगी सुनहरी बॉर्डर गर्भगृह को क्षीर सागर जैसा रूप दे रही थी। ठाकुर जी के चरणों में गुलाब की पंखुड़ियों का कालीन बिछाया गया था, वहीं आसपास सजे नीले और गुलाबी कमल के फूलों ने पूरे माहौल को वैकुंठ धाम में बदल दिया।

ट्रस्ट अध्यक्ष गोविंद प्रसाद सोडाणी ने बताया कि अधिक मास भगवान पुरुषोत्तम की भक्ति का सबसे उत्तम समय है। इस पूरे महीने ठाकुर जी रोजाना अलग-अलग स्वरूपों (जैसे कृष्ण लीला, राम अवतार, नरसिंह अवतार) में भक्तों को दर्शन देकर निहाल करेंगे। शाम को महाआरती के दौरान पूरा परिसर ‘जय श्री सांवरिया सेठ’ और ‘हरे कृष्णा’ के जयकारों से गुंजायमान रहा।

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