विश्व शांति कल्याण चातुर्मास सत्संग में आचार्यश्री ने भक्ति, मन की साधना और मानव कल्याण को जीवन का वास्तविक उद्देश्य बताया।
भीलवाड़ा। अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्री रामदयालजी महाराज ने कहा कि संसारी और संत के जीवन में सबसे बड़ा अंतर उनकी सोच और लक्ष्य का होता है। संसारी जहां कंचन, कामिनी, सत्ता और संपत्ति के पीछे दौड़ता है, वहीं सच्चा संत इन सभी आकर्षणों से ऊपर उठकर केवल परमात्मा की प्राप्ति को अपना लक्ष्य बनाता है। उन्होंने कहा कि “संसारी सत्ता के पीछे दौड़ता है, जबकि संत के पीछे सत्ता स्वयं दौड़ती है।”
आचार्यश्री मंगलवार को आयोजित ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के अंतर्गत दैनिक सत्संग को संबोधित कर रहे थे। उनके प्रवचनों को सुनने के लिए भीलवाड़ा सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
भक्ति ही जीवन को महकाती है
आचार्यश्री ने कहा कि संत और संसारी की दृष्टि में जमीन-आसमान का अंतर होता है। संसारी सत्ता और संपत्ति को सुख का माध्यम मानता है, जबकि संत सत्ता को संताप और संपत्ति को विपत्ति समझता है। उन्होंने कहा कि वास्तविक सुख केवल ईश्वर भक्ति, आत्मिक शांति और साधना में ही निहित है।
उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति चातुर्मास के दौरान अपने मन को साधना सीख जाए तो उसका चातुर्मास सफल हो जाता है। मन भौतिक सुख-सुविधाओं से नहीं, बल्कि भक्ति, सेवा और साधना से महकता है।
राम-नाम से मन की चंचलता होती है समाप्त
आचार्यश्री ने मन की चंचलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मन चूहे की तरह चंचल होता है। यदि यह मन राम-नाम का निरंतर स्मरण करे तो इसकी चंचलता समाप्त होकर मन स्थिर हो जाता है। उन्होंने कहा कि राम-नाम की साधना ही मन को संयमित करने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान करते हुए कहा कि जीवन का उद्देश्य बहकना नहीं, बल्कि महकना होना चाहिए। सत्ता, संपत्ति, सौंदर्य और ज्ञान का उपयोग अहंकार के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र, समाज और मानवता के कल्याण के लिए होना चाहिए।
संत समाज को जोड़ने का करते हैं कार्य
आचार्यश्री ने कहा कि संतों ने सदैव समाज को जोड़ने, संस्कार देने और मानवता का मार्ग दिखाने का कार्य किया है। जीवन और मृत्यु प्रकृति का स्वाभाविक क्रम है, इसलिए मनुष्य को मोह-माया में उलझने के बजाय अपने जीवन को सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए।
इससे पूर्व वरिष्ठ संत नरपत रामजी (उदयपुर) ने धर्म, सेवा और सदाचार पर अपने विचार रखे। कार्यवाहक भंडारी संत जगवल्लभ रामजी ने भी श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जीवन अपनाने की प्रेरणा दी। सत्संग में भंडारी संत खुशीरामजी, संत गौतमरामजी एवं संत जयरामजी का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालु मंजू समदानी ने गुरुभक्ति भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। समापन पर झंवर परिवार, संजय कॉलोनी के सदस्यों ने आचार्यश्री की आरती उतारकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
प्रतिदिन हो रहे आध्यात्मिक आयोजन
चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन सुबह 5 से 6 बजे तक रामधुनी, 8:30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ, 9 से 10 बजे तक दैनिक सत्संग तथा सूर्यास्त के समय संध्या आरती का आयोजन किया जा रहा है। इन आयोजनों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।
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Bhilwara, Rajasthan
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