राजस्थान प्रदेश माली-सैनी महासभा ने सभी उपजातियों को एक ही नाम के अंतर्गत शामिल करने की मांग उठाई।
जयपुर। आगामी जाति जनगणना में समाज की सभी उपजातियों को अलग-अलग दर्ज करने के बजाय जाति कॉलम में केवल “सैनी/माली” नाम अंकित करने की मांग को लेकर राजस्थान प्रदेश माली-सैनी महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने राजधानी जयपुर में निदेशक जनगणना राजस्थान को ज्ञापन सौंपा।
महासभा के प्रदेश अध्यक्ष छुट्टन लाल सैनी एवं प्रदेश उपाध्यक्ष बाबूलाल सैनी रजवास ने बताया कि देशभर में स्थानीय परंपराओं, क्षेत्रों और उपनामों के कारण समाज के लोगों के नाम सरकारी अभिलेखों में अलग-अलग रूपों में दर्ज होते रहे हैं। इससे समाज की वास्तविक एकजुट पहचान प्रभावित होती है।
सभी उपजातियों को एक नाम से दर्ज करने की मांग
महासभा पदाधिकारियों ने कहा कि वर्ष 1931 की जाति जनगणना में समाज की संयुक्त आबादी को दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में विभिन्न स्तरों पर आंतरिक वर्गीकरण हो गया। उन्होंने मांग की कि आगामी जनगणना में इस प्रकार के विभाजन से बचते हुए समाज की सभी उपजातियों को “सैनी/माली” नाम के अंतर्गत दर्ज किया जाए।
उन्होंने कहा कि एक समान जाति नाम दर्ज होने से समाज की सही जनसंख्या एवं सामाजिक स्थिति का आंकलन बेहतर तरीके से हो सकेगा।
प्रदेशभर में चलाया जाएगा जनजागरण अभियान
महासभा ने बताया कि इस मांग को लेकर राजस्थान में विशेष जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। अभियान के माध्यम से समाज के लोगों को जागरूक किया जाएगा कि जनगणना के दौरान अपनी जाति का नाम “सैनी/माली” के रूप में दर्ज कराएं।
इसके साथ ही केंद्र सरकार एवं जनगणना आयुक्त से भी आग्रह किया जाएगा कि समाज की सभी उपजातियों को एक ही मुख्य नाम के अंतर्गत शामिल किया जाए।
दिल्ली स्तर पर भी उठाई जा चुकी है मांग
महासभा पदाधिकारियों ने बताया कि यह मांग अखिल भारतीय स्तर पर भी उठाई जा चुकी है। दिल्ली में महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त के समक्ष भी समाज की ओर से इस विषय को रखा गया है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश अध्यक्ष छुट्टन लाल सैनी फुलवाले, प्रदेश उपाध्यक्ष बाबूलाल सैनी रजवास, कोषाध्यक्ष किशनलाल सैनी, यादराम सैनी, धर्म सैनी और पर्व सैनी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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Tonk, Rajasthan
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