छह विधायक देने वाला कनेछन कलां गांव, फिर भी हिन्दी माध्यम शिक्षा से वंचित विद्यार्थी


राजनीति में पहचान बनाने वाला कनेछन कलां शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा, कक्षा 6 से 12 तक हिन्दी माध्यम नहीं होने से छात्र दूर-दराज पढ़ने को मजबूर।

शाहपुरा। छह विधायक देने वाला कनेछन कलां गांव राजनीतिक पहचान के बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में गंभीर उपेक्षा का सामना कर रहा है। शाहपुरा विधानसभा क्षेत्र का यह गांव पूरे इलाके में “विधायक नगरी” के नाम से प्रसिद्ध है। यहां की धरती ने अब तक छह जनप्रतिनिधियों को विधानसभा तक पहुंचाया है, लेकिन विडंबना यह है कि इसी गांव के विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा हिन्दी माध्यम में पढ़ाई के लिए दूसरे कस्बों का रुख करना पड़ रहा है।

ग्राम पंचायत मुख्यालय होने के बावजूद कनेछन कलां में कक्षा 6 से 12 तक हिन्दी माध्यम की पढ़ाई उपलब्ध नहीं है। गांव में महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, राजकीय बाल उच्च माध्यमिक विद्यालय, राजकीय प्राथमिक विद्यालय, कस्तूरबा गांधी आवासीय छात्रावास तथा श्री अम्बेडकर राजकीय समाज कल्याण छात्रावास जैसी शैक्षणिक संस्थाएं संचालित हैं, लेकिन माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर पर हिन्दी माध्यम बंद होने से ग्रामीण विद्यार्थियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

अंग्रेजी माध्यम बनने के बाद बंद हुआ हिन्दी माध्यम

ग्रामीणों के अनुसार पूर्ववर्ती राज्य सरकार द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय को महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय (अंग्रेजी माध्यम) में परिवर्तित किए जाने के बाद हिन्दी माध्यम की पढ़ाई पूरी तरह समाप्त हो गई। इसका सबसे अधिक प्रभाव आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर पड़ा। कई विद्यार्थी अंग्रेजी माध्यम में अध्ययन जारी नहीं रख सके और उन्हें दूसरे विद्यालयों में प्रवेश लेना पड़ा, जबकि कुछ विद्यार्थियों ने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी।

17 किलोमीटर दूर पढ़ने को मजबूर छात्र

वर्तमान में गांव के विद्यार्थियों को कक्षा 6 से 12 तक हिन्दी माध्यम में अध्ययन के लिए 17 किलोमीटर दूर शाहपुरा अथवा 10 किलोमीटर दूर फूलियाकलां जाना पड़ता है। प्रतिदिन लंबी दूरी तय करने, परिवहन की कमी और अतिरिक्त खर्च के कारण अनेक विद्यार्थी नियमित रूप से विद्यालय नहीं पहुंच पाते। शिक्षा विशेषज्ञ इसे ग्रामीण क्षेत्र में बढ़ते ड्रॉपआउट का प्रमुख कारण मान रहे हैं।

छात्रावास की सीटें भी पड़ी हैं खाली

इस समस्या का असर सरकारी योजनाओं पर भी दिखाई दे रहा है। गांव में संचालित श्री अम्बेडकर राजकीय समाज कल्याण छात्रावास में करीब 25 सीटें खाली पड़ी हैं। वहीं कक्षा 11वीं और 12वीं में हिन्दी एवं अंग्रेजी दोनों माध्यमों में विद्यार्थियों की संख्या शून्य होना शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

जनप्रतिनिधियों से समाधान की मांग

ग्राम पंचायत प्रशासक गीता देवी गुर्जर ने बताया कि पंचायत मुख्यालय होने के बावजूद विद्यार्थियों को हिन्दी माध्यम की सुविधा उपलब्ध नहीं होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में स्थानीय विधायक, सांसद तथा राजस्थान सरकार के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री को कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।

उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर गांव के विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में हिन्दी माध्यम की शिक्षा उपलब्ध कराएगी।

शिक्षक संघ ने उठाई हिन्दी माध्यम बहाल करने की मांग

समग्र शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष रामधन बैरवा ने कहा कि कनेछन कलां जैसे बड़े पंचायत मुख्यालय पर हिन्दी माध्यम की शिक्षा उपलब्ध होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार केवल विद्यालय भवन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप अध्ययन का माध्यम भी मिलना चाहिए।

उन्होंने शिक्षा विभाग से मांग की कि महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय कनेछन कलां में अंग्रेजी माध्यम के साथ-साथ हिन्दी माध्यम भी पुनः प्रारंभ किया जाए, ताकि ग्रामीण विद्यार्थियों को अपने गांव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो सके।

ग्रामीणों ने जताई भविष्य को लेकर चिंता

ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में अधिक संख्या में विद्यार्थी शिक्षा से विमुख हो सकते हैं। उनका कहना है कि जिस गांव ने प्रदेश को छह विधायक दिए, वहां के बच्चों को अपनी भाषा में शिक्षा के लिए दूसरे कस्बों में भटकना पड़े, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

अब क्षेत्रवासियों की निगाहें राज्य सरकार और शिक्षा विभाग पर टिकी हैं। सभी को उम्मीद है कि जल्द ही कनेछन कलां के विद्यार्थियों को अपने गांव में हिन्दी माध्यम से पढ़ाई का अधिकार मिल सकेगा।

यह भी पढ़ें:


Aawaz Aapki News WhatsApp चैनल से जुड़ें:

सबसे तेज़ और ताज़ा खबरें सीधे अपने व्हाट्सएप पर पाएं।

WhatsApp अभी जुड़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *