भीमताल में आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यशाला, मंत्री मदन कौशिक ने लिया हिस्सा


कार्यशाला में आपदा प्रबंधन को मजबूत करने, रिस्पॉन्स टाइम कम करने और आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग पर दिया गया जोर।

नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल से करीब 22 किलोमीटर दूर भीमताल विकास भवन सभागार में शनिवार को आपदा जोखिम न्यूनीकरण विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने हिस्सा लिया और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।

कार्यशाला का शुभारंभ पंचायती राज, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, आयुष एवं आयुष शिक्षा, पुनर्गठन एवं जनगणना मंत्री मदन कौशिक ने किया। इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण, राहत एवं बचाव कार्य, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली तथा आधुनिक तकनीक के उपयोग से जुड़े विषयों पर जानकारी साझा की।

आपदा में धनराशि की कमी नहीं आने दी जाएगी: मदन कौशिक

मीडिया से बातचीत करते हुए मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि उत्तराखंड में जब भी कहीं आपदा की स्थिति उत्पन्न हुई है, सरकार के प्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों की पहल की है। उन्होंने उत्तरकाशी में किए गए राहत कार्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि आपदा से संबंधित कार्यों के लिए धनराशि की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी।

उन्होंने जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल को निर्देश दिए कि यदि आपदा से संबंधित किसी कार्य के लिए धनराशि की आवश्यकता शेष है तो उसका शीघ्र एस्टीमेट तैयार कर शासन को भेजा जाए, ताकि आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराई जा सके।

आपदा प्रबंधन में रिस्पॉन्स टाइम कम करने पर जोर

मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड ने पिछले वर्षों में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं। बड़ी आपदाओं के दौरान त्वरित राहत एवं बचाव अभियान चलाकर नुकसान को कम करने का प्रयास किया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में आपदा प्रबंधन तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के साथ सूचना तंत्र को बेहतर बनाया जा रहा है और आपदा की स्थिति में रिस्पॉन्स टाइम कम करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि राहत एवं बचाव दल कम से कम समय में प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच सकें।

उन्होंने कहा कि बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक और त्वरित प्रतिक्रिया के माध्यम से आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सकता है।

सभी विभागों को आपदा प्रबंधन तंत्र से जोड़ने पर जोर

मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल संसाधनों की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि आपदा के समय उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम एवं प्रभावी उपयोग भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में इस तरह की कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, ताकि विभिन्न विभागों, एजेंसियों और संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों को आपदा की स्थिति में अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग एवं प्रशिक्षित किया जा सके।

उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा आपदा प्रबंधन प्रणाली को और सुदृढ़ बनाने तथा त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था विकसित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया।

सामुदायिक सशक्तिकरण जरूरी: विनय रुहेला

कार्यशाला में राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला ने कहा कि आपदा प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए जनपद स्तर पर विभिन्न विभागों के बीच बेहतर आपसी सामंजस्य आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन की जानकारी देने के साथ उन्हें आपदा के प्रति सजग और संवेदनशील बनाना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आपदा प्रबंधन को लेकर गंभीर और संवेदनशील हैं तथा आपदा की स्थिति में त्वरित निर्णय लेकर राहत कार्यों को गति देते हैं।

भूतपूर्व सैनिकों को आपदा प्रबंधन तंत्र से जोड़ने की पहल

आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष ले. कर्नल रघुवीर सिंह भंडारी (सेवानिवृत्त) ने आपदा के दौरान त्वरित रिस्पॉन्स, खोज एवं बचाव, राहत कार्य तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि भूतपूर्व सैनिकों एवं अर्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त अधिकारियों और जवानों को राज्य के आपदा प्रबंधन तंत्र से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। उनके अनुभव का उपयोग आपदा के समय राहत एवं बचाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में किया जा सकता है।

सभी जिलों में आयोजित हो रही प्रशिक्षण कार्यशालाएं

अपर सचिव आपदा प्रबंधन प्रकाश चन्द्र ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से प्रदेश के सभी जिलों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि कार्यशालाओं में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, क्षमता विकास, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, आपदा के दौरान समन्वित कार्रवाई और आधुनिक आपदा प्रबंधन तंत्र से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने दी जानकारी

कार्यशाला के तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने आपदा प्रबंधन के विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। डॉ. पी.डी. माथुर ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण के फ्रेमवर्क एवं लक्ष्यों पर जानकारी दी।

डॉ. वेदिका पंत ने Incident Response System (IRS) के प्रभावी क्रियान्वयन, रोहित कुमार ने GIS प्रणाली एवं सचेत एप, जबकि निखिल पुनिया ने आपदा प्रबंधन क्षमता विकास, IDRN पोर्टल एवं मोबाइल एप के उपयोग की जानकारी दी।

इसके अलावा आपदा की तैयारी, पूर्व चेतावनी प्रणाली, खोज एवं बचाव कार्य तथा आपदा के दौरान व्यवहारिक प्रबंधन से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई।

जिलाधिकारी ने मानसून में हुए नुकसान की दी जानकारी

कार्यशाला से पूर्व जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक का बुके भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने मानसून काल के दौरान जनपद में प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान, राहत कार्यों तथा पुनर्निर्माण कार्यों के लिए विभिन्न विभागों को आवंटित धनराशि के संबंध में जानकारी दी।

कार्यशाला में विधायक नैनीताल सरिता आर्या, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरमवाल, राज्य आपदा सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष विनय रुहेला, रघुवीर सिंह भंडारी, दर्जा राज्य मंत्री भावना मेहरा, ब्लॉक प्रमुख हरीश बिष्ट, मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पांडे, अपर जिलाधिकारी सौरभ असवाल सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि एवं विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

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