प्रयागराज में अभियोजन कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक, गंभीर मामलों में प्रभावी पैरवी के निर्देश


अपर जिलाधिकारी सत्यम मिश्र ने लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण, गवाहों की उपस्थिति और गंभीर अपराधों में मजबूत पैरवी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए

प्रयागराज, 25 जून। जनपद में अभियोजन कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने तथा न्यायालयों में लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के उद्देश्य से बुधवार को संगम सभागार में अभियोजन कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का आयोजन जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा के निर्देश के क्रम में किया गया, जिसकी अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी नगर सत्यम मिश्र ने की।

बैठक में न्यायालयों में विचाराधीन मामलों, लंबित अभियोजन प्रकरणों तथा विभिन्न वादों के निस्तारण की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान अपर जिलाधिकारी ने अभियोजन अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि गंभीर एवं संवेदनशील मामलों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा उनके समयबद्ध निस्तारण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

लंबित मामलों में गवाहों और साक्ष्यों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश

समीक्षा बैठक के दौरान अपर जिलाधिकारी सत्यम मिश्र ने कहा कि न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को साक्ष्यों एवं गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने कहा कि यदि गवाह और आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध होंगे तो मामलों की सुनवाई प्रभावित नहीं होगी और न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सकेगी।

उन्होंने अभियोजन अधिकारियों से कहा कि सभी महत्वपूर्ण मामलों की नियमित समीक्षा कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें।

पुलिस और अभियोजन विभाग के बीच बेहतर समन्वय पर जोर

बैठक में अपर जिलाधिकारी ने पुलिस एवं अभियोजन विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में प्रभावी पैरवी और मजबूत साक्ष्य न्याय सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि न्यायालयों में प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों की गुणवत्ता और उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि अभियोजन पक्ष मजबूत रह सके।

महिला अपराध और पॉक्सो मामलों में संवेदनशीलता बरतने के निर्देश

समीक्षा बैठक में महिला अपराध, पॉक्सो एक्ट, गैंगस्टर एक्ट, गुंडा एक्ट एवं अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों की विशेष रूप से समीक्षा की गई।

अपर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में विशेष संवेदनशीलता बरती जाए तथा ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि इन प्रकरणों में प्रभावी पैरवी कर दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाना प्राथमिकता होनी चाहिए।

अधिक से अधिक मामलों में दोषियों को सजा दिलाने पर बल

अपर जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाए और मेरिट के आधार पर अधिक से अधिक मामलों में दोषियों को सजा दिलाई जाए।

उन्होंने कहा कि जनसामान्य में सुरक्षा और विश्वास का वातावरण बनाए रखना सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। इसके लिए आवश्यक है कि गंभीर मामलों में मजबूत साक्ष्य और प्रभावी पैरवी के माध्यम से न्यायालयों में अभियोजन पक्ष को मजबूत बनाया जाए।

समयबद्ध और कठोर सजा दिलाना प्राथमिकता

बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि गंभीर अपराधों में शामिल दोषियों को समयबद्ध एवं कठोर सजा दिलाना प्रशासन और अभियोजन विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि अभियोजन एवं पुलिस विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि कोई भी दोषी सजा से बच न सके तथा न्यायालयों में प्रभावी पैरवी के माध्यम से अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

ये अधिकारी रहे उपस्थित

बैठक में संयुक्त निदेशक अभियोजन मुकेश गोयल, डीजीसी मनोज कुमार पाण्डेय, अन्य अभियोजन अधिकारी तथा पुलिस विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में विभिन्न प्रकरणों की प्रगति, लंबित मामलों की स्थिति और अभियोजन कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई।

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