भागवत महापुराण की जयंती पर संत नवनिधराम ने बताया महात्म्य


रामनिवास धाम में महाप्रभु रामचरणजी महाराज को छप्पन भोग, संत मस्तराम ने वामन अवतार और प्रहलाद चरित्र का किया विवेचन।

शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी। भागवत महापुराण की जयंती के अवसर पर रामनिवास धाम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान मंगलवार को धार्मिक उल्लास का वातावरण रहा। रामस्नेही संप्रदाय के आद्याचार्य महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज को छप्पन भोग अर्पित किया गया। इस अवसर पर कार्यवाहक भंडारी संत नवनिधरामजी महाराज ने श्रीमद्भागवत के महात्म्य और इसकी ज्ञान परंपरा पर प्रकाश डाला।

संत नवनिधरामजी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत का श्रवण मनुष्य को भक्ति, ज्ञान और सदाचार की ओर ले जाता है। उन्होंने भागवत की ज्ञान परंपरा में महर्षि वेदव्यास और देवर्षि नारद के विशेष महत्व का उल्लेख करते हुए इसके आध्यात्मिक संदेशों को जीवन में अपनाने पर जोर दिया।

वेदव्यास और नारद की ज्ञान परंपरा का किया उल्लेख

संत नवनिधरामजी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत की ज्ञान परंपरा में महर्षि वेदव्यास और देवर्षि नारद का विशेष महत्व है। उन्होंने परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि नारदजी के निर्देश और प्रेरणा से वेदव्यास ने श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना पूर्ण की।

उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत में भगवान के विभिन्न अवतारों और उनकी लोककल्याणकारी लीलाओं के माध्यम से जीवन को सही दिशा देने वाले संदेश मिलते हैं। भागवत का श्रवण मनुष्य को भक्ति और ज्ञान के साथ सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

बुद्धि का उपयोग परहित में हो: संत मस्तराम

कथा वाचक मालपुरा के संत मस्तरामजी महाराज ने वामन अवतार और भक्त प्रहलाद के प्रसंगों का विवेचन किया। उन्होंने कहा कि भगवान का प्रत्येक अवतार लोककल्याण का संदेश देता है।

संत मस्तरामजी महाराज ने कहा कि मनुष्य की बुद्धि तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के कल्याण में किया जाए। शरीर से व्यक्ति छोटा हो सकता है, लेकिन उसकी सोच और बुद्धि बड़ी होनी चाहिए। सही बुद्धि और विवेक के बल पर व्यक्ति बड़े कार्य कर सकता है।

उन्होंने कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह संदेश भी दिया कि जीवन में प्राप्त बुद्धि और विवेक का उपयोग परहित के लिए किया जाना चाहिए। इससे व्यक्ति के जीवन को सार्थक दिशा मिल सकती है।

प्रतिकूल परिस्थितियों में भी भगवान का स्मरण न छोड़ें

संत मस्तरामजी महाराज ने भक्त प्रहलाद का उदाहरण देते हुए कहा कि जीवन में परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, मनुष्य को भगवान का स्मरण नहीं छोड़ना चाहिए। प्रहलाद ने कठिन परिस्थितियों में भी भगवान को याद किया और अपनी भक्ति पर अडिग रहे।

उन्होंने कहा कि मनुष्य अक्सर दुख के समय भगवान को याद करता है, जबकि सुख के समय उन्हें भूल जाता है। सुख और दुख दोनों में परमात्मा का स्मरण बना रहे, यही भक्ति का वास्तविक स्वरूप है।

महाप्रभु रामचरणजी महाराज को अर्पित किया छप्पन भोग

कथा के दौरान रामस्नेही संप्रदाय के आद्याचार्य महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज को छप्पन भोग अर्पित किया गया। धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया और संतों के प्रवचनों से आध्यात्मिक संदेश प्राप्त किया।

कार्यक्रम में कार्यवाहक भंडारी संत नवनिधरामजी महाराज, कथा वाचक संत मस्तरामजी महाराज और आयोजक जगदीश सोनी परिवार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

कथा में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

रामनिवास धाम में श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण के लिए श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। कथा का आयोजन 24 सितंबर तक चलेगा।

रामस्नेही संप्रदाय की मर्यादाओं के अनुरूप आयोजित इस कथा में धार्मिक प्रसंगों के साथ जीवन में भक्ति, सदाचार, परहित और ईश्वर स्मरण का संदेश दिया जा रहा है। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु संतों के प्रवचन सुनने के लिए पहुंच रहे हैं।

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