पद्मश्री तारापद रजक की प्रस्तुति में मयूर नृत्य और देवी-देवताओं के चित्रण ने मोहा मन, विद्यार्थियों ने जानी भारतीय लोकसंस्कृति की समृद्ध परंपरा
भीलवाड़ा। सजे-धजे मुखौटे, आकर्षक वेशभूषा और लयबद्ध नृत्य के बीच जब मंच पर मां दुर्गा के नौ स्वरूप साकार हुए तो दर्शक मंत्रमुग्ध रह गए। भगवान कार्तिकेय के मयूर नृत्य और शिव-पार्वती सहित विभिन्न देवी-देवताओं के प्रभावशाली चित्रण ने भारतीय पौराणिक कथाओं को जीवंत कर दिया। मौका था स्पीक मैके और संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित विरासत-2026 कार्यक्रम का, जिसमें 13 अक्टूबर को विश्वप्रसिद्ध छऊ कलाकार पद्मश्री तारापद रजक ने विशेष प्रस्तुति दी।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाचार्या आशा भाटिया और आमंत्रित कलाकारों ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद पश्चिम बंगाल की पारंपरिक छऊ नृत्य शैली पर आधारित प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ।
कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा, भव्य मुखौटों, भाव-भंगिमाओं और लयबद्ध नृत्य के माध्यम से पौराणिक प्रसंगों को मंच पर सजीव रूप में प्रस्तुत किया। स्पीक मैके भीलवाड़ा की कॉर्डिनेटर अनु प्रजापत ने बताया कि प्रस्तुति में भारतीय संस्कृति की विविध छवियों को आकर्षक अंदाज में दर्शाया गया।
मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की प्रस्तुति रही प्रमुख आकर्षण
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मां दुर्गा के नौ स्वरूपों पर आधारित छऊ नृत्य रहा। कलाकारों ने पौराणिक कथाओं में वर्णित विभिन्न असुरों के अंत से जुड़े प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन किया।
प्रस्तुति में मधु-कैटभ, चिक्षुर, धूमलोचन, तारकासुर, रक्तबीज, निशुंभ, शुंभ और महिषासुर जैसे असुरों से जुड़े प्रसंगों को नृत्य के माध्यम से दर्शाया गया। इन प्रस्तुतियों के जरिए बुराई, अज्ञान और अंधकार पर विजय के साथ शक्ति, सद्भाव और अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया।
कार्तिकेय के मयूर नृत्य ने बांधा समां
भगवान कार्तिकेय के मयूर नृत्य ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। कलाकारों की सधी हुई गतियों, पारंपरिक नृत्य शैली और आकर्षक भाव-भंगिमाओं ने मंच पर मनोहारी दृश्य प्रस्तुत किया।
भगवान गणेश, कार्तिकेय, शिव-पार्वती और अन्य देवी-देवताओं के स्वरूपों के चित्रण ने भी दर्शकों को प्रभावित किया। पारंपरिक मुखौटों और वेशभूषा के साथ कलाकारों की प्रस्तुति ने छऊ नृत्य की विशिष्टता और भारतीय लोककला की विविधता को सामने रखा।
विद्यार्थियों को भारतीय लोकसंस्कृति से जुड़ने का अवसर
विरासत-2026 कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को भारतीय लोककलाओं और पौराणिक परंपराओं को करीब से जानने का अवसर दिया। प्रस्तुति के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि पारंपरिक कलाएं केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक पहचान और विरासत की संवाहक भी हैं।
ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने तथा लोककलाओं के संरक्षण और संवर्धन के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलती है।
कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकगण, विद्यार्थी और अन्य अतिथि उपस्थित रहे। पद्मश्री तारापद रजक की प्रस्तुति ने भारतीय लोकसंस्कृति की जीवंतता, विविधता और समृद्ध परंपरा की प्रभावशाली झलक प्रस्तुत की।
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Bhilwara, Rajasthan
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