नवरात्रा महोत्सव में महाआरती और भजन संध्या की धूम, महापौर जसवंत कंवर, उपमहापौर राधेश्याम सोमानी और एडीएम हरितिमा ने किए दर्शन
भीलवाड़ा। मां मंशापूर्णा माताजी के जयकारों, भजनों की गूंज और गरबा की थाप के बीच श्रीबाबाधाम में नवरात्रा महोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। अध्यक्ष विनीत अग्रवाल के सानिध्य में आयोजित महोत्सव में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन, महाआरती और गरबा में भाग ले रहे हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त पैदल चलकर मां के दरबार में पहुंच रहे हैं। सुबह से देर शाम तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है।
सुबह विशेष आरती से शुरू होता है पूजन का क्रम
नवरात्रा के दौरान प्रतिदिन सुबह 7:15 बजे विशेष आरती की जाती है। इसके बाद पैदल आने वाले श्रद्धालुओं का सिलसिला शुरू हो जाता है। मां मंशापूर्णा माताजी के त्रिशूल पर लच्छा बांधकर मनोकामना मांगने और मनोकामना पूर्ण होने पर दरबार में पहुंचने की परंपरा के प्रति भक्तों में विशेष आस्था देखने को मिल रही है।
मां के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठता है। सुबह 9:15 बजे श्रीबाबाधाम के आचार्य पं. गौतम गोविंद एवं अन्य पंडितों के सानिध्य में मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन और आहुतियां दी जाती हैं। मां अन्नपूर्णा वैष्णोदेवी का विशेष श्रृंगार भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
भजन संध्या में भक्तिरस से सराबोर हुए श्रद्धालु
शाम को आयोजित भजन संध्या में श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते नजर आए। ‘चलो बुलावा आया है’, ‘नंगे-नंगे पांव चले आ गया रे मां तेरा पुजारी’ और ‘मैया का दरबार सुहाना लगता है’ जैसे भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
भजन गायकों की प्रस्तुतियों के बीच श्रद्धालु मां के जयकारे लगाते रहे। शाम 7:15 बजे विशेष महाआरती आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। आरती के बाद मंदिर परिसर में गरबा नृत्य का आयोजन हुआ। इसमें श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ भाग लिया।
महापौर, उपमहापौर और एडीएम ने किए दर्शन
रविवार को आयोजित महाआरती में भीलवाड़ा की महापौर जसवंत कंवर, उपमहापौर राधेश्याम सोमानी, पूर्व पार्षद नरपत सिंह और अतिरिक्त जिला कलेक्टर हरितिमा सहित कई समाजसेवी, जनप्रतिनिधि और धर्मप्रेमी शामिल हुए।
अतिथियों ने मां मंशापूर्णा के दर्शन कर मंदिर की व्यवस्थाओं और प्रतिष्ठा की सराहना की। उन्होंने कहा कि श्रीबाबाधाम की ख्याति देशभर में है और यहां संचालित सेवा व्यवस्था सराहनीय है।
दानपेटी नहीं, सेवा को दिया जाता है महत्व
श्रीबाबाधाम की विशेष परंपरा में मंदिर में दानपेटी नहीं होना और मनोकामना पूर्ण होने पर जरूरतमंदों को भोजन कराने, गायों को चारा खिलाने तथा पक्षियों को दाना डालने जैसे सेवा कार्यों को प्रोत्साहित करना शामिल है।
अतिथियों ने इस परंपरा की सराहना करते हुए सेवा और परोपकार के महत्व को रेखांकित किया। मंदिर में धार्मिक आस्था के साथ जरूरतमंदों की सहायता और जीवों के प्रति संवेदना का संदेश भी दिया जा रहा है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं
महाआरती और गरबा के दौरान श्रद्धालुओं को असुविधा न हो, इसके लिए अध्यक्ष विनीत अग्रवाल के निर्देशन में विशेष व्यवस्थाएं की गईं।
गरबा प्रभारी राजेश नैनावटी के साथ कमल जैन, सावन नामा, सैंडी वर्मा और राहुल साहू ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया। वहीं दर्शन व्यवस्था में हिमांशु नामा, भारत खोरल और अमित शर्मा सहित सेवादार जुटे रहे।
गोद भराई की रस्म और प्रसाद के प्रति श्रद्धा
महाआरती के बाद मेहंदी लगवाने वाले श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। संतान प्राप्ति की कामना लेकर आए दंपतियों की गोद भराई की रस्म भी संपन्न हुई। इसके बाद तलवार का झाड़ा लगाया गया।
श्रद्धालुओं ने श्रीबाबाधाम की चुटकी यानी भभूत और अखंड ज्योत के घी को श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया। पूरे आयोजन के दौरान मां मंशापूर्णा के प्रति भक्तों की अटूट आस्था, उत्साह और सेवा भावना देखने को मिली।
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Bhilwara, Rajasthan
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