शाहपुरा की आसावा नगर कॉलोनी जलमग्न, जल निकासी व्यवस्था पर उठे सवाल


पहली तेज बारिश में घरों तक पहुंचा पानी, 20 साल पुरानी कॉलोनीवासियों ने शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं होने का आरोप लगाया।

शाहपुरा। मौसम की पहली तेज बारिश ने उमेद सागर रोड स्थित आसावा नगर कॉलोनी की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। कुछ ही समय की बारिश के बाद कॉलोनी में जगह-जगह पानी भर गया और कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि करीब 20 वर्षों से कॉलोनी बारिश के मौसम में जल निकासी की समस्या से जूझ रही है।

कॉलोनीवासियों के अनुसार बारिश का पानी कई मकानों के आसपास जमा हो गया है। खाली भूखंडों में भी पानी भरने से स्थिति और गंभीर हो गई है। लंबे समय तक पानी जमा रहने के कारण मकानों की नींव और दीवारों पर असर पड़ने के साथ ही मच्छरों और मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है।

20 साल पुरानी कॉलोनी, जल निकासी की समस्या जस की तस

आसावा नगर कॉलोनी का विकास करीब दो दशक पहले आईडीएसएमटी योजना के तहत हुआ था। कॉलोनीवासियों का कहना है कि इतने वर्षों में क्षेत्र की आबादी और आसपास का शहरी विस्तार लगातार बढ़ा, लेकिन बरसाती पानी की स्थायी निकासी की समस्या का समाधान नहीं हो पाया।

लोगों के मुताबिक हर बारिश में कॉलोनी के कई हिस्सों में पानी जमा हो जाता है। कई बार पानी मकानों तक पहुंच जाता है और खाली भूखंड तालाब जैसे नजर आने लगते हैं।

बारिश से पहले दो बार दी शिकायत, फिर भी समाधान नहीं

स्थानीय निवासियों का दावा है कि इस वर्ष बारिश का मौसम शुरू होने से पहले ही नगर पालिका के प्रशासक एवं उपखंड अधिकारी को दो बार लिखित शिकायत दी गई थी। शिकायत में समय रहते जल निकासी की व्यवस्था करने की मांग की गई थी।

कॉलोनीवासियों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि अधिकारियों द्वारा मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन किए जाने की भी आवश्यकता है।

हर बारिश में मकानों के आसपास जमा होता है पानी

अधिवक्ता एवं बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रामप्रसाद जाट ने कहा कि आसावा नगर में बरसाती पानी की समुचित निकासी की व्यवस्था नहीं है। बारिश के दौरान मकानों के आसपास पानी जमा हो जाता है और कई खाली भूखंडों में भी लंबे समय तक जलभराव बना रहता है।

उन्होंने कहा कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए केवल बारिश के समय पानी निकालने के बजाय पूरे क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था का तकनीकी सर्वे कराया जाना चाहिए।

नगरपालिका की जिम्मेदारी को लेकर उठे सवाल

कॉलोनीवासियों ने राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 में नगर निकाय की जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए जल निकासी और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की है।

लोगों का कहना है कि शहर में नालियों, वर्षाजल निकासी और सार्वजनिक स्वच्छता की व्यवस्था को बेहतर बनाना निकाय की जिम्मेदारी का हिस्सा है। ऐसे में आसावा नगर जैसी आवासीय कॉलोनी में लंबे समय से बनी जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पाया, यह सवाल अब चर्चा का विषय बन गया है।

खाली भूखंडों में भी जमा हो रहा पानी

कॉलोनी में कई भूखंड लंबे समय से खाली पड़े हैं। बारिश के बाद इन भूखंडों में पानी जमा हो जाता है, जिससे मच्छरों के पनपने और मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है।

कॉलोनीवासियों ने मांग की है कि ऐसे खाली भूखंडों के संबंध में लागू नियमों और मूल आवंटन शर्तों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। साथ ही जलभराव वाले स्थानों की नियमित सफाई और पानी निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

निर्वाचित बोर्ड नहीं, प्रशासनिक व्यवस्था में चल रहा काम

फिलहाल नगर पालिका में निर्वाचित बोर्ड नहीं होने के कारण प्रशासनिक व्यवस्था के तहत कामकाज संचालित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बोर्ड निर्वाचित हो या प्रशासनिक व्यवस्था हो, आमजन को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी बनी रहती है।

लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बारिश के दौरान अस्थायी इंतजामों के बजाय स्थायी जल निकासी योजना तैयार की जाए।

समाधान नहीं हुआ तो मतदान बहिष्कार की चेतावनी

जलभराव से परेशान कॉलोनीवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई तो आगामी निकाय चुनाव में मतदान बहिष्कार जैसे कदम पर विचार किया जा सकता है।

मदन मोहन शर्मा, आदित्य गर्ग, भूपेंद्र सिंह, शंकर रैदास, जय शर्मा, गिरिराज गर्ग, ओमप्रकाश चितलांगिया सहित कॉलोनीवासियों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

अब सवाल बारिश का नहीं, स्थायी व्यवस्था का

आसावा नगर की मौजूदा स्थिति ने जल निकासी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि पूरे क्षेत्र का लेवल सर्वे, जल प्रवाह का अध्ययन और वैज्ञानिक ड्रेनेज प्लान तैयार किया जाए, ताकि हर मानसून में जलभराव की समस्या दोहराई न जाए।

कॉलोनीवासियों का कहना है कि करीब दो दशक पुरानी आवासीय कॉलोनी को अब ऐसी स्थायी व्यवस्था की जरूरत है, जिससे बारिश का पानी लंबे समय तक बस्ती में जमा न रहे और लोगों को हर वर्ष इसी समस्या का सामना न करना पड़े।

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