कागजों पर चमकती इमारतों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं और पढ़ाई की स्थिति पर उठे सवाल, शिक्षकों की कमी, जांच और इलाज के लिए भटक रहे लोग
प्रयागराज। बारा क्षेत्र में विकास कार्यों के दावों के बीच स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ‘कागजों पर चमकता बारा, जमीन पर तरसता बारा’ सीरीज के दूसरे भाग में स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक विद्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को सामने लाने का प्रयास किया गया है। स्थानीय लोगों की शिकायतों के अनुसार, अस्पतालों में डॉक्टरों और जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता तथा स्कूलों में शिक्षकों की कमी जैसी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।
सीरीज के पहले भाग में क्षेत्र के विकास कार्यों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर को लेकर सवाल उठाए गए थे। अब दूसरे भाग में स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे आमजन से सीधे जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल, इलाज के लिए दूसरे केंद्रों का रुख
स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र के कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर दोपहर बाद चिकित्सकों की उपलब्धता मुश्किल हो जाती है। लोगों ने रात के समय आपातकालीन सेवाओं, दवाओं और जांच सुविधाओं को लेकर भी चिंता जताई है।
एक स्थानीय महिला ने बताया कि बुखार से पीड़ित बच्चे को लेकर सीएचसी पहुंचने पर उसे प्रयागराज ले जाने की सलाह दी गई। महिला के अनुसार, उस समय एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। हालांकि, इस घटना और एंबुलेंस में ईंधन की कमी संबंधी दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
लोगों का कहना है कि मरीजों को कई बार दवाओं के लिए बाहर के मेडिकल स्टोर और जांच के लिए निजी लैब का रुख करना पड़ता है। इन शिकायतों के बीच स्वास्थ्य विभाग से सरकारी केंद्रों पर चिकित्सकों, दवाओं और जांच सुविधाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग उठ रही है।
आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम पर ग्रामीण स्वास्थ्य का भार
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को घर-घर तक पहुंचाने में आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम की भूमिका महत्वपूर्ण है। स्थानीय स्तर पर इन कार्यकर्ताओं को समय पर मानदेय और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने की जरूरत भी सामने रखी गई है।
यमुना कछार के कुछ गांवों में संस्थागत प्रसव के लिए महिलाओं को दूर स्थित स्वास्थ्य केंद्रों तक जाना पड़ने की शिकायतें हैं। संपर्क मार्गों की समस्या के कारण गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों की मांग है कि स्वास्थ्य केंद्रों पर जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ दुर्गम क्षेत्रों में पहुंच और परिवहन की व्यवस्था भी बेहतर की जाए।
स्कूलों में शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित होने की शिकायत
शिक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों ने जसरा ब्लॉक के कुछ प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि कई जगह एक ही शिक्षक को एक से अधिक कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।
ऐसी स्थिति में सभी कक्षाओं को पर्याप्त समय देना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की नियमित पढ़ाई और सीखने के स्तर में सुधार के लिए विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षकों की तैनाती जरूरी है।
लोगों ने यह भी मांग की कि स्कूलों में केवल भवन और रंगाई-पुताई पर ध्यान देने के बजाय शिक्षण व्यवस्था, कक्षा संचालन और विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति पर भी नियमित निगरानी होनी चाहिए।
आठवीं के बाद पढ़ाई के लिए दूर जाने की मजबूरी
बारा क्षेत्र के कुछ मजरा और ग्रामीण बस्तियों में माध्यमिक शिक्षा के लिए बच्चों को दूसरे गांवों में जाना पड़ता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई स्थानों पर सड़क और परिवहन सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं, जिससे विद्यार्थियों को परेशानी होती है।
एक अभिभावक ने बताया कि वह अपनी बेटी को आगे पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन स्कूल तक पहुंचने के लिए जंगल के रास्ते कई किलोमीटर पैदल चलना चिंता का विषय है। उनका कहना है कि गांव तक पक्की सड़क या नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध होने से बेटियों की पढ़ाई जारी रखने में मदद मिल सकती है।
ग्रामीणों ने माध्यमिक शिक्षा की पहुंच बढ़ाने, सुरक्षित आवागमन और छात्राओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
डिजिटल शिक्षा की सुविधाओं पर भी उठे सवाल
सरकारी विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, टैबलेट और इंटरनेट जैसी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय स्तर पर कुछ विद्यालयों में बिजली और डिजिटल उपकरणों के नियमित उपयोग में कठिनाइयों की शिकायत की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि डिजिटल शिक्षा का लाभ तभी मिल सकता है, जब उपकरणों के साथ बिजली, इंटरनेट और उनके संचालन के लिए जरूरी व्यवस्था भी उपलब्ध हो। उन्होंने विद्यालयों में डिजिटल संसाधनों की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करने और अनुपयोगी उपकरणों को चालू कराने की मांग की है।
जनता की मांग, इमारतों के साथ सेवाएं भी मिलें
बारा क्षेत्र के लोगों का कहना है कि उन्हें केवल नए भवन या रंगी हुई दीवारें नहीं, बल्कि अस्पतालों में नियमित चिकित्सक और स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक चाहिए। स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में लोगों ने डॉक्टरों की उपलब्धता, दवाओं, जांच और आपातकालीन सुविधाओं को प्राथमिकता देने की मांग की है।
वहीं शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों की नियुक्ति, स्कूलों तक सुरक्षित पहुंच, बिजली और डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया गया है।
2027 से पहले स्वास्थ्य और शिक्षा के सवाल
स्वास्थ्य और शिक्षा ऐसे मुद्दे हैं जिनका असर हर परिवार पर पड़ता है। बारा क्षेत्र में इन सुविधाओं को लेकर उठ रही शिकायतों के बीच स्थानीय लोग विकास कार्यों की समीक्षा और सरकारी सेवाओं की जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
अब सवाल यह है कि संबंधित विभाग इन समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं। क्षेत्र में स्वास्थ्य और शिक्षा की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए विभागीय आंकड़ों, निरीक्षण रिपोर्टों और संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
सीरीज का अगला भाग: भाग-3 में बारा क्षेत्र में पेयजल संकट, यमुना किनारे बसे गांवों में पानी की उपलब्धता और रोजगार के लिए युवाओं के पलायन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
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Prayagraj, Ouuta Pradesh
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