चार दिन बाद खत्म हुआ आंदोलन, विभाग ने 48 घंटे में नहरों में पानी छोड़ने का भरोसा दिया, किसानों ने जताई संतुष्टि।
प्रयागराज। बारा क्षेत्र में खरीफ फसलों के लिए सिंचाई जल की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन प्रयाग के बैनर तले पिछले चार दिनों से चल रहा जल सत्याग्रह आंदोलन गुरुवार को समाप्त हो गया। सिंचाई विभाग के अधिकारियों द्वारा 48 घंटे के भीतर नहरों में पानी छोड़ने का पुख्ता आश्वासन दिए जाने के बाद किसानों ने अपना धरना समाप्त करने का निर्णय लिया।
किसानों का कहना था कि खरीफ फसलों की रोपाई के महत्वपूर्ण समय में नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने से धान सहित अन्य फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई थीं। कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद समाधान नहीं होने पर सैकड़ों किसान नहर किनारे धरने पर बैठ गए थे।
दो घंटे चली वार्ता के बाद बनी सहमति
आंदोलन के चौथे दिन तहसीलदार बारा अनिल कुमार पाठक, सिंचाई विभाग के एसडीओ शशांक सिंह, जेई मनोज कुमार, प्रकाश चंद और धर्मदास मौके पर पहुंचे। अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों के बीच करीब दो घंटे तक वार्ता हुई।
वार्ता के बाद विभाग ने आश्वासन दिया कि 48 घंटे के भीतर मुख्य नहर और उसकी सभी शाखाओं में पानी छोड़ा जाएगा तथा रोटेशन प्रणाली के अनुसार प्रत्येक गांव तक सिंचाई का पानी पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
किसानों ने चेतावनी भी दी
भारतीय किसान यूनियन प्रयाग के जिलाध्यक्ष ने कहा कि किसान प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा करते हुए आंदोलन स्थगित कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि तय समय सीमा में नहरों में पानी नहीं पहुंचा तो किसान पहले से बड़े स्तर पर दोबारा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
15 हजार हेक्टेयर भूमि को मिलेगी राहत
बारा क्षेत्र की लगभग 15 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि इस नहर प्रणाली पर निर्भर है। किसानों का कहना है कि समय पर पानी मिलने से 20 हजार से अधिक किसान परिवारों को राहत मिलेगी और खरीफ की फसल बच सकेगी।
आंदोलन समाप्त होने के बाद किसानों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जताई। अब क्षेत्र के किसानों की निगाहें विभाग के उस वादे पर टिकी हैं कि निर्धारित 48 घंटे के भीतर नहरों में पानी छोड़ा जाता है या नहीं।
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Prayagraj, Ouuta Pradesh
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