जमीन विवाद की रंजिश में सुपारी देकर कराई थी हत्या, संप्रदाय से निष्कासित पूर्व संत अब सलाखों के पीछे
शाहपुरा/चित्तौड़गढ़। मूलचन्द पेसवानी चित्तौड़गढ़ के बहुचर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले रमेश ईनाणी हत्याकांड में पुलिस को रविवार को एक बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल हुई है। पिछले 6 महीनों से पुलिस के साथ ‘चूहे-बिल्ली’ का खेल खेल रहा मुख्य साजिशकर्ता और 50 हजार रुपये का इनामी आरोपी रमता राम आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ गया है। कोतवाली थाना पुलिस ने एक सटीक घेराबंदी के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया है, जिसे इस पूरे हत्याकांड का ‘मास्टरमाइंड’ माना जा रहा है।
क्या था पूरा मामला?
यह खूनी खेल 11 नवंबर 2025 की सुबह शुरू हुआ था। कृष्णा नगर निवासी भाजपा नेता और कुरियर व्यवसायी रमेश चंद्र ईनाणी अपनी स्कूटी से रोजाना की तरह दुकान की ओर जा रहे थे। जैसे ही वे सिटी पेट्रोल पंप के पास पहुंचे, घात लगाए बैठे हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका दहल गया। गंभीर रूप से घायल ईनाणी को उदयपुर रेफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इस दिनदहाड़े हुई हत्या ने पूरे शहर के कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे।
जनाक्रोश और पुलिस की कार्रवाई
हत्याकांड के विरोध में व्यापारियों और भाजपा कार्यकर्ताओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा था। भारी दबाव के बीच पुलिस ने जांच का जाल बिछाया। सबसे पहले यूपी के वाराणसी से शूटर मनीष कुमार को पकड़ा गया। इसके बाद सिरोही के भजनाराम और मिर्जापुर के अरविंद दुबे की गिरफ्तारी हुई। इन गिरफ्तारियों ने साफ कर दिया कि यह केवल एक हमला नहीं, बल्कि पेशेवर अपराधियों के जरिए अंजाम दी गई एक सोची-समझी खूनी साजिश थी।
30 साल पुरानी रंजिश और खूनी अंत
पुलिस पूछताछ और जांच में यह बात सामने आई कि रमेश ईनाणी और रमता राम के बीच करीब तीन दशक पुराना जमीन विवाद चल रहा था। यह रंजिश इतनी गहरी हो गई कि रमता राम ने ईनाणी को रास्ते से हटाने के लिए सुपारी किलर का सहारा लिया। वारदात के बाद रमता राम लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। जिला पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी और उदयपुर रेंज आईजी गौरव श्रीवास्तव ने उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार का इनाम रखा था।
संत से अपराधी बनने का सफर
इस केस में एक चौंकाने वाला पहलू यह भी है कि मुख्य आरोपी रमता राम पहले रामस्नेही संप्रदाय से जुड़ा हुआ था और एक संत के रूप में जाना जाता था। हालांकि, हत्या की साजिश में नाम उजागर होने के तुरंत बाद संप्रदाय ने उसे निष्कासित कर दिया था।
अब खुलेंगे कई और राज
रमता राम की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस को उम्मीद है कि साजिश की परतें और भी खुलेंगी। क्या इस हत्याकांड में कुछ और सफेदपोश लोग भी शामिल थे? क्या सुपारी की रकम का कोई और भी स्रोत था? इन सभी सवालों के जवाब अब पुलिस रिमांड के दौरान मिलने की संभावना है। पूरे चित्तौड़गढ़ जिले की नजरें अब रमता राम के बयानों और पुलिस के अगले कदम पर टिकी हैं।
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