किसान खरीफ की फसल का बीमा 31 जुलाई तक कराएं; गैर ऋणी किसान भी करा सकते हैं फसल बीमा


चौथ का बरवाड़ा 17 जुलाई। कृषि विभाग द्वारा खरीफ 2025 के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की अधिसूचना जारी की गई है। योजना के अंतर्गत चौथ का बरवाड़ा तहसील क्षेत्र में केवल उड़द, बाजरा एवं तिल फसलों को अधिसूचित किया गया है। बीमा एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा किया जाएगा।
सहायक कृषि अधिकारी विजय जैन ने किसानों को जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के तहत फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है। फसली ऋण (केसीसी) लेने वाले किसानों का बीमा संबंधित बैंक शाखा द्वारा स्वतः कर दिया जाएगा। वहीं वे कृषक जिन्होंने फसली ऋण नहीं लिया है, वे अपना फसल बीमा राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल, निकटतम बैंक शाखा, सीएससी केंद्र या बीमा कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से करवा सकते हैं। गैर-ऋणी कृषकों को बीमा आवेदन के साथ आधार कार्ड, नवीनतम जमाबंदी की नकल, स्वयं प्रमाणित घोषणा पत्र जिसमें खसरा संख्या, फसल क्षेत्र, मालिकाना विवरण एवं बीमा हित की प्रकृति (स्वयं या बंटाईदार) दर्ज हो तथा बैंक पासबुक की प्रति देनी होगी।
फसल बीमा योजना के अंतर्गत उड़द फसल के लिए प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 36,405 रुपये निर्धारित की गई है, जिस पर कृषक को 728.10 रुपये का प्रीमियम देना होगा। बाजरा फसल के लिए बीमित राशि 44,767 रुपये प्रति हेक्टेयर तथा कृषक प्रीमियम 895.34 रुपये निर्धारित किया गया है। तिल फसल के लिए बीमित राशि 38,640 रुपये और कृषक प्रीमियम 772.80 रुपये प्रति हेक्टेयर तय किया गया है। किसानों को कुल बीमित राशि का केवल 2 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा, शेष राशि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी।
योजना में प्रावधान अनुसार यदि बुवाई किसी कारणवश बाधित या निष्फल रह जाती है तो बीमित राशि का 25 प्रतिशत तक क्षतिपूर्ति के रूप में बीमा कंपनी द्वारा भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा यदि बुवाई से लेकर कटाई तक की अवधि में फसल को बेमौसमी वर्षा, बाढ़, ओलावृष्टि, प्राकृतिक आग या अन्य किसी प्राकृतिक आपदा से क्षति होती है, तो फसल कटाई प्रयोग के आधार पर क्षति का आंकलन कर बीमित कृषक को मुआवजा दिया जाएगा। वहीं यदि कटाई के बाद खेत में सुखाने हेतु रखी गई फसल को 14 दिनों के भीतर प्राकृतिक आपदा से नुकसान होता है, तो उसका व्यक्तिगत स्तर पर आंकलन किया जाएगा और मुआवजा देय होगा।
सहायक कृषि अधिकारी विजय जैन ने बताया कि किसानों को किसी भी प्राकृतिक आपदा या क्षति की स्थिति में, घटना घटित होने के 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना कृषि रक्षक पोर्टल, क्रॉप इंश्योरेंस ऐप, हेल्पलाइन नंबर 14447, निकटतम कृषि कार्यालय या संबंधित बैंक शाखा में देना अनिवार्य है, ताकि मुआवजा प्राप्त करने की प्रक्रिया समय पर प्रारंभ हो सके।


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