शाहपुरा (मूलचन्द पेसवानी)। अरावली की पहाड़ियों के बीच बसे विजयपुर में भक्ति की अविरल धारा बह निकली है। शुक्रवार को नृसिंहद्वारा के समीप कृषि फार्म पर सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिन आयोजित कलश यात्रा और संत दिग्विजय राम के ओजस्वी प्रवचनों ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक रंग में सराबोर कर दिया।
कलश यात्रा और प्रभात फेरियों का महासंगम: कथा की शुरुआत से पूर्व नृसिंहद्वारा से एक विशाल कलश यात्रा निकाली गई। बैंड-बाजों की मधुर धुनों और मंगल गीतों के बीच सजी-धजी महिलाएं सिर पर कलश धारण कर चल रही थीं। इस दौरान क्षेत्र की विभिन्न प्रभात फेरियों का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिससे वातावरण “जय श्री कृष्णा” के जयकारों से गुंजायमान हो गया।
परमात्मा का स्मरण ही सच्चा सुख – संत दिग्विजय राम: कथामर्मज्ञ संत दिग्विजय राम ने व्यासपीठ से कहा कि भागवत कथा परमात्मा के मुख से निकला वह सर्वोत्तम ग्रंथ है, जिसके श्रवण मात्र से मनुष्य का कल्याण हो जाता है। उन्होंने जोर दिया कि भौतिकवादी युग में केवल भक्ति मार्ग ही शांति और परमानंद का जरिया है।
आयोजन की व्यवस्थाएं: मूंदड़ा परिवार (बंशी लाल व दामोदर मूंदड़ा) द्वारा आयोजित इस कथा में हजारों भक्तों की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, आवास और पेयजल के कड़े इंतजाम किए गए हैं। कथा प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 4:30 बजे तक चलेगी, जिसका समापन 7 मई को होगा। उद्घाटन सत्र में राव नरेन्द्र सिंह विजयपुर और श्यामलाल शर्मा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।