अपने मन की इच्छाओं को पूरा नहीं करना, इच्छाओं पर नियंत्रण रखें
बड़ोदिया, बांसवाड़ा। अरुण जोशी। धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री शुद्ध सागर जी महाराज ने कहा कि आपके अंदर क्रोध करने की शक्ति है कर भी सकते हैं लेकिन फिर भी क्रोध नहीं कर रहे। आपके पास पैसे हैं जो चाहे खा सकते हैं फिर भी जो मां बाप को पसंद हों वही में खाऊंगा जो तुम्हारी मां खिलायें वही खाना। जिनके साथ रह रहे है उनके अनुसार चलना ऐसे ही भगवान के दर पर आया है तो भगवान की जो इच्छा है बस वहीं करूंगा। अपने मन कि इच्छा पूर्ति करने में मत लगना। एक दिन आप जिनवाणी मां जो कह रही है वह कर लेना अरे अहो भाग्य है हमारे जो जिनवाणी कहेगी जो जिनवाणी बताएगी जो गुरु बनाएंगे वहीं करूंगा। पिच्छिका परिवर्तन 9 नवंबर रविवार को समाज के जीतमल तलाटी, सुरेश चंद्र तलाटी, निलेश तलाटी, कमलेश दोसी चारों समाज के सेठ ने बताया कि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के परम शिष्य मुनि श्री शुद्ध सागर जी महाराज व क्षुल्लक अकम्प सागरजी महाराज के चातुर्मास पिच्छिका परिवर्तन समारोह नो नवंबर रविवार को विद्यालय मैदान में दोपहर एक बजे से आयोजित होगा । संयम के इस कोमल उपकरण पिच्छिका को देने का व मुनि श्री के हाथों से प्राप्त करने वाले सोभाग्यशाली परिवार वहीं पिच्छिका ले पाएंगे जो मुनि श्री द्वारा बताएं गये नियमों का पालन करने की सामर्थ्य रखता हो । मुनि श्री शुद्ध सागर जी महाराज ने कहा कि दिगम्बर मुनि वर्ष पर्यन्त पिच्छिका अपने पास इसलिए रखते हैं चलते हुए, बैठते, उठते छोटे छोटे जीवों को कोमल मयुर पंखों बचाया जा सके । तथा यही पिच्छिका जब कोई श्रावक मुनि के हाथों पुरानी पिच्छिका प्राप्त करता है तो वह भी मन, वचन और काया से संयम जैसा जीवन जिना प्रारंभ करता है । इसलिए उनको पिच्छिका देकर उनका गृहस्थ जीवन भी धर्ममय बना देते हैं ।
