पाँचना बांध विवाद: हाईकोर्ट का कड़ा रुख, कमांड क्षेत्र की नहरों में तुरंत पानी छोड़ने के आदेश


गंगापुर सिटी। पंकज शर्मा करौली जिले में स्थित पाँचना बांध से पानी छोड़ने को लेकर चल रहा दशकों पुराना विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और जल संसाधन विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कमांड एरिया की नहरों में तुरंत पानी खोला जाए। अदालत ने इस मामले में प्रशासन की ढिलाई पर सख्त नाराजगी जाहिर की है।

न्यायालय की कड़ी फटकार: “01 मई तक पालना रिपोर्ट दें”

गंगापुर सिटी विधायक एवं उपनेता प्रतिपक्ष रामकेश मीना द्वारा दायर जनहित याचिका (C.W. 12479/2022) एवं फाइनल डिस्पोजल PIL-400 पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश श्री एस. पी. शर्मा एवं श्रीमती शुभा मेहता की खंडपीठ ने मामले को बेहद गंभीर माना। विधायक की ओर से विद्वान अधिवक्ता विकास सैनी ने पैरवी की।

न्यायालय ने आदेश में स्पष्ट किया कि:

  • कमांड क्षेत्र के किसानों के हक को और अधिक समय तक नहीं रोका जा सकता।

  • नहरों में पानी तत्काल प्रभाव से छोड़ा जाए और लंबित नए कार्यों को तत्परता से पूरा किया जाए।

  • यदि आदेश की पालना नहीं होती है, तो आगामी 01 मई 2026 को जल संसाधन विभाग के सचिव और चीफ इंजीनियर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना होगा।

2005 से राजनीति का शिकार है पाँचना का पानी

विधायक ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर अवगत कराया कि वर्ष 2005 से ही पाँचना बांध क्षेत्रीय राजनीति और कुछ लोगों की हठधर्मिता की भेंट चढ़ा हुआ है। इस कारण कमांड क्षेत्र के हजारों किसान सिंचाई के पानी से महरूम हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में न केवल फसलों का नुकसान हो रहा है, बल्कि बेजुबान पशु-पक्षियों के लिए पीने के पानी का भी भारी संकट खड़ा हो गया है।

विधानसभा में बार-बार मुद्दा उठाने और मंत्रियों के आश्वासनों के बावजूद धरातल पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं होने के कारण अंततः न्यायपालिका की शरण लेनी पड़ी।

प्रशासनिक संवेदनहीनता पर उठाए सवाल

विधायक ने पत्र के माध्यम से प्रशासन के नकारात्मक रवैये पर भी प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि संभागीय आयुक्त (भरतपुर), जो जल वितरण समिति के अध्यक्ष हैं, और करौली व सवाई माधोपुर के जिला कलेक्टर (समिति सदस्य) होने के बावजूद बैठकें आयोजित करने में विफल रहे हैं। यह सरकार और स्थानीय प्रशासन की किसानों के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाता है।

शांति व्यवस्था और किसानों की राहत सर्वोपरि

उपनेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए तत्काल नहरें खोली जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि पानी छोड़ने से न केवल किसानों को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि क्षेत्र में लंबे समय से व्याप्त तनाव भी कम होगा और शांति व्यवस्था कायम रह सकेगी।

अब सबकी नजरें 01 मई की तारीख पर टिकी हैं, जब सरकार को कोर्ट में अपनी अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी है। किसानों में इस आदेश के बाद उम्मीद की नई किरण जगी है।


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