समाजसेवी अमित कुमार तिवारी ने भूमि विवादों के समयबद्ध निस्तारण, पुलिस-राजस्व समन्वय और पारदर्शी व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रयागराज। भूमि विवादों के त्वरित समाधान की आवश्यकता पर जोर देते हुए समाजसेवी अमित कुमार तिवारी ने शासन और प्रशासन के समक्ष कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भूमि केवल जमीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि किसान और आम नागरिक की आजीविका, सम्मान और भविष्य का आधार है। इसके बावजूद प्रदेशभर में बड़ी संख्या में परिवार वर्षों से भूमि विवादों और लंबी मुकदमेबाजी के कारण आर्थिक, मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
हर थाने में साप्ताहिक जनता दरबार की उठाई मांग
अमित कुमार तिवारी ने सुझाव दिया कि प्रत्येक पुलिस थाने में सप्ताह में एक दिन पुलिस एवं राजस्व विभाग का संयुक्त जनता दरबार आयोजित किया जाए। उनका कहना है कि यदि दोनों विभाग मिलकर भूमि विवादों का प्रारंभिक और समयबद्ध समाधान करें, तो बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण न्यायालय पहुंचने से पहले ही हो सकता है।
भूमि किसान की आजीविका और सम्मान का आधार
उन्होंने कहा कि भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी पूंजी भूमि है। किसान के लिए यह केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उसकी आजीविका, सम्मान और भविष्य की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में खेत की मेड़, पैतृक संपत्ति के बंटवारे, सीमांकन, नामांतरण, कब्जे और राजस्व अभिलेखों की त्रुटियों से जुड़े लाखों मामले वर्षों से लंबित हैं, जिससे आम नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
लंबी मुकदमेबाजी से बढ़ रही आर्थिक और सामाजिक परेशानी
अमित तिवारी ने कहा कि न्याय मिलने में होने वाली देरी का सबसे अधिक प्रभाव सामान्य नागरिकों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि लगातार तारीखें, वकीलों की फीस, दस्तावेजों का खर्च और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लोगों को आर्थिक रूप से कमजोर कर देते हैं। कई परिवार कर्ज में डूब जाते हैं, जबकि अनेक मामलों में पीढ़ियों तक विवाद समाप्त नहीं हो पाते। उन्होंने यह भी कहा कि छोटे भूमि विवाद कई बार हिंसक संघर्ष का रूप ले लेते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
डिजिटलीकरण और पारदर्शी व्यवस्था पर दिया जोर
समाजसेवी अमित कुमार तिवारी ने कहा कि भूमि अभिलेखों का शत-प्रतिशत डिजिटलीकरण, समयबद्ध सीमांकन, पारदर्शी नामांतरण व्यवस्था और राजस्व विभाग की जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से भूमि रिकॉर्ड को अधिक विश्वसनीय और आम नागरिकों के लिए आसानी से उपलब्ध बनाया जा सकता है।
जागरूकता अभियान और विभागीय समन्वय जरूरी
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में कानूनी जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता भी बताई। उनके अनुसार यदि लोगों को नामांतरण, बंटवारे, सीमांकन और पंजीकरण की सही प्रक्रिया की जानकारी समय पर मिले और दस्तावेजों का नियमित अद्यतन हो, तो भविष्य में कई विवादों को रोका जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पुलिस और राजस्व विभाग के बीच बेहतर समन्वय विकसित करना आवश्यक है। दोनों विभागों के संयुक्त प्रयास से अधिकांश भूमि विवादों का प्रभावी समाधान संभव है। साथ ही प्रशासनिक जवाबदेही तय कर लापरवाही और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जाना चाहिए।
समय पर न्याय से बढ़ेगा विश्वास और विकास
अमित कुमार तिवारी ने कहा कि भूमि विवादों का समयबद्ध समाधान होने से सामाजिक तनाव कम होगा, पारिवारिक संबंध मजबूत होंगे, कृषि उत्पादन और निवेश में वृद्धि होगी तथा ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि सुशासन का वास्तविक पैमाना यही है कि आम नागरिक को न्याय कितनी सरलता और कितनी शीघ्रता से मिलता है।
उन्होंने कहा कि भूमि विवादों का समाधान केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक शांति और लोकतांत्रिक विश्वास की रक्षा का भी विषय है। अब समय आ गया है कि सरकारें इसे जनकल्याण और सुशासन के महत्वपूर्ण एजेंडे के रूप में प्राथमिकता दें। उनका मानना है कि जब लोगों को समय पर न्याय मिलेगा, तभी गांवों में विश्वास मजबूत होगा, परिवारों में सौहार्द बढ़ेगा और विकास की राह वास्तव में प्रशस्त होगी।
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