एनएच-35 पर गोवंशों का जमावड़ा, बारा से मुर्का तक हादसों का खतरा


हाईवे पर सैकड़ों गोवंश, ग्रामीणों ने गौशालाओं में चारा-पानी और देखरेख की व्यवस्था पर उठाए सवाल

प्रयागराज।राष्ट्रीय राजमार्ग प्रयागराज-बांदा-झांसी एनएच-35 पर तहसील बारा से जनपद बॉर्डर मुर्का तक इन दिनों सड़क पर गोवंशों का जमावड़ा राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। दिन हो या रात, सैकड़ों की संख्या में गोवंश हाईवे पर बैठे और घूमते नजर आते हैं। तेज रफ्तार ट्रकों और डंपरों की चपेट में आने से गोवंशों के हादसों का खतरा बना रहता है। साथ ही बाइक सवार और अन्य राहगीरों के लिए भी हाईवे पर अचानक सामने आने वाले पशु गंभीर जोखिम पैदा कर रहे हैं।

हाईवे पर क्यों घूम रहे गोवंश

स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब सरकार की ओर से ग्राम पंचायत स्तर पर गौशालाओं और कान्हा उपवन के नाम पर व्यवस्थाएं की जा रही हैं, तो बड़ी संख्या में गोवंश आखिर राष्ट्रीय राजमार्ग पर क्यों दिखाई दे रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि गौशालाओं में गोवंशों के लिए पर्याप्त चारा, पानी, छाया और देखरेख की व्यवस्था हो तो उन्हें हाईवे पर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऐसे में स्थानीय लोगों ने गौशालाओं की व्यवस्था और वहां रखे जाने वाले गोवंशों की स्थिति की जांच की मांग उठाई है।

गौशालाओं की व्यवस्था पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

स्थानीय लोगों के अनुसार, बारा क्षेत्र की कुछ गौशालाओं में व्यवस्थाओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई जगह गंदगी और जलभराव के बीच गोवंशों को रखा जा रहा है। उनके अनुसार, पर्याप्त चारा, छाया और पानी की व्यवस्था नहीं होने से पशुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ गोवंशों की मौत हो चुकी है और कर्मचारियों के वेतन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन गौशालाओं की व्यवस्थाओं की मौके पर जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाए।

क्षमता से अधिक पशु होने का भी आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि बारा क्षेत्र की कुछ गौशालाओं में क्षमता से अधिक पशु रखे जाने, चारे की उपलब्धता और देखरेख की व्यवस्था को लेकर भी सवाल हैं। उनका आरोप है कि पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण भूखे-प्यासे गोवंश गौशालाओं की चारदीवारी से निकलकर सड़क और हाईवे पर पहुंच जाते हैं।

इसका सीधा असर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा पर पड़ रहा है। हाईवे पर घूमते गोवंशों के कारण वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

रात में बढ़ जाता है हादसों का खतरा

रात के समय स्थिति और गंभीर हो जाती है। हाईवे के कई हिस्सों में अंधेरा होने के कारण सड़क पर बैठे काले रंग के गोवंश दूर से आसानी से दिखाई नहीं देते। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे पर गोवंशों को रोकने के लिए पर्याप्त बैरिकेडिंग या अन्य सुरक्षा इंतजाम नजर नहीं आते।

ऐसे में तेज रफ्तार भारी वाहनों के साथ बाइक और अन्य छोटे वाहनों के चालकों के लिए भी खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों ने हाईवे पर गोवंशों की आवाजाही रोकने के साथ-साथ सड़क सुरक्षा के जरूरी इंतजाम किए जाने की मांग की है।

जिम्मेदार विभागों से व्यवस्था सुधारने की मांग

स्थानीय लोगों ने एनएचएआई, पशुपालन विभाग और तहसील प्रशासन से पूरे मामले में प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि हाईवे पर घूम रहे गोवंशों को सुरक्षित रूप से गौशालाओं में पहुंचाने के साथ वहां चारा, पानी, छाया और नियमित देखरेख की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो हाईवे पर गोवंशों और वाहन चालकों दोनों के लिए दुर्घटना का खतरा बना रहेगा।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी गोवंश की मौत के मामले में किसी अन्य कारण को आधार बनाकर जांच सीमित कर दी जाती है, तो एनएच-35 पर होने वाले हादसों और गोवंशों की मौत की जिम्मेदारी किसकी होगी। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मामले का संज्ञान लेकर गौशालाओं और हाईवे की स्थिति की जांच कराने की मांग की है।

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