प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन, पुस्तक की जांच, ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर संशोधन और विवादित सामग्री पर रोक की मांग।
भीलवाड़ा। वीरांगना पन्नाधाय के इतिहास और सामाजिक पहचान को लेकर प्रकाशित एक पुस्तक में दिए गए विवरण पर विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय बजरंग दल और श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने पुस्तक में प्रकाशित विवरण को ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ बताते हुए विरोध दर्ज कराया है। दोनों संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा प्रामाणिक ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर पुस्तक में संशोधन करने की मांग की।
राष्ट्रीय बजरंग दल के जिलाध्यक्ष रितेश गुर्जर एवं श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के जिलाध्यक्ष धनराज सिंह अमरतिया के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। संगठनों ने कहा कि ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय महत्व की विभूतियों से संबंधित साहित्य में तथ्यों की प्रमाणिकता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
पुस्तक के पृष्ठ संख्या 8 पर प्रकाशित विवरण पर आपत्ति
करणी सेना के प्रदेश सचिव महीपाल सिंह ने बताया कि केंद्रीय प्रकाशन विभाग की पुस्तक ‘भारत के नारी रत्न’ के पृष्ठ संख्या 8 पर वीरांगना पन्नाधाय की जीवनी प्रकाशित की गई है।
प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि पुस्तक में पन्नाधाय की मूल ऐतिहासिक पहचान को बदलकर उन्हें ‘खींची राजपूत वंश की क्षत्राणी’ के रूप में दर्शाया गया है। संगठनों ने इस विवरण की प्रमाणिकता पर सवाल उठाते हुए इसकी विशेषज्ञों के माध्यम से जांच कराने की मांग की है।
ऐतिहासिक तथ्यों की प्रमाणिकता बनाए रखने की मांग
राष्ट्रीय बजरंग दल के जिलामंत्री पवन व्यास ने कहा कि पन्नाधाय का जीवन त्याग, स्वामिभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है। उनके अनुसार ऐतिहासिक तथ्यों में बदलाव कर किसी महान बलिदानी के जीवन को प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर गुर्जर समाज सहित विभिन्न वर्गों में असंतोष है। संगठनों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी वर्ग का विरोध करना नहीं, बल्कि इतिहास की प्रमाणिकता एवं सत्यता को बनाए रखना है।
इतिहासकारों की संयुक्त समिति से जांच की मांग
ज्ञापन में पुस्तक के पृष्ठ संख्या 8 पर प्रकाशित विवरण की समीक्षा कर प्रामाणिक ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर तत्काल संशोधन करने की मांग की गई।
इसके साथ ही संगठनों ने इतिहासकारों, विषय विशेषज्ञों एवं संबंधित समाज के प्रतिनिधियों की संयुक्त समिति गठित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का प्रस्ताव रखा है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि जांच के बाद सामने आने वाले प्रमाणों के आधार पर ही पुस्तक में आवश्यक सुधार किया जाना चाहिए।
पन्नाधाय की प्रतिमा स्थापित करने की भी मांग
प्रतिनिधिमंडल ने पन्नाधाय सर्किल पर वीरांगना पन्नाधाय की प्रतिमा विधि-विधान के साथ स्थापित करने की मांग भी रखी।
इसके अलावा जांच एवं संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने तक विवादित पुस्तक के आगामी संस्करणों और पुनर्मुद्रण के वितरण पर रोक लगाने की मांग की गई। संगठनों ने राष्ट्रीय एवं ऐतिहासिक महत्व की विभूतियों से संबंधित साहित्य प्रकाशित करने से पहले प्रामाणिक ऐतिहासिक स्रोतों का अनिवार्य सत्यापन सुनिश्चित करने की मांग भी की।
ज्ञापन देने के दौरान कई कार्यकर्ता रहे मौजूद
ज्ञापन कार्यक्रम के दौरान बालमुकुंद प्रजापत, पवन व्यास, राहुल जाट, अरविंद सिंह, सोनू प्रजापत, भरत सिंह, नवीन गाडरी, पूरण मल, बनवारी गाडरी, लोकपाल, जितेंद्र गुर्जर, लोकेश खटीक, धनराज सिंह, महावीर सिंह, महेंद्र सिंह, हेमेंद्र सिंह, दशरथ सिंह, लाल सिंह, महिपाल सिंह, जालम सिंह, पृथ्वीराज नकवाल, विजय सिंह, शुभम सिंह, बंटी सिंह सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री तक अपनी मांग पहुंचाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और ऐतिहासिक तथ्यों के अनुरूप आवश्यक संशोधन की मांग दोहराई।
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Bhilwara, Rajasthan
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