राष्ट्र संत पुलकसागरजी बोले- व्यक्ति नहीं, व्यवस्था बदलने की जरूरत; चातुर्मास में राष्ट्र, संस्कृति और परिवार व्यवस्था पर होगा विशेष मंथन।
भीलवाड़ा। भीलवाड़ा में पहली बार राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पूज्य पुलकसागरजी महाराज का चातुर्मास आयोजित होने जा रहा है। गुरुवार को मंडपिया स्थित आरएसडब्ल्यूएम परिसर में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि “जब तक हम स्वयं बदलने का संकल्प नहीं करेंगे, तब तक भगवान भी हमें नहीं बदल सकते।” उन्होंने बताया कि चातुर्मास का उद्देश्य समाज में आत्मपरिवर्तन, सद्भाव, संस्कार और राष्ट्र चेतना को मजबूत करना है।
पुलकसागरजी महाराज ने कहा कि भीलवाड़ा की वर्षों पुरानी चातुर्मास की भावना इस वर्ष साकार हो रही है। उन्होंने बताया कि भीलवाड़ा को इसलिए चुना गया क्योंकि यहां सांप्रदायिक सौहार्द, मानवीयता और अच्छे श्रोताओं की समृद्ध परंपरा है। उन्होंने कहा कि अच्छे श्रोता ही अच्छे वक्ता बनाते हैं और वस्त्रनगरी में चातुर्मास के माध्यम से लोगों के दिलों के ताने-बाने जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
राष्ट्र, समाज और संस्कृति पर होगा विशेष चिंतन
करीब 11 वर्षों के अंतराल के बाद तीसरी बार भीलवाड़ा पहुंचे पुलकसागरजी महाराज ने कहा कि इस चातुर्मास में राष्ट्र, समाज और व्यक्ति के हित से जुड़े विषयों पर विशेष चर्चा होगी। भारतीय संस्कृति, परिवार व्यवस्था और राष्ट्र पुनर्स्थापना पर मंथन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति से समाज, समाज से राष्ट्र और राष्ट्र से विश्व का निर्माण होता है। इसलिए परिवार रूपी जड़ों को मजबूत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
25 जुलाई को होगा मंगल प्रवेश, कई आयोजन होंगे
पुलकसागरजी महाराज ने बताया कि 25 जुलाई को चातुर्मासिक मंगल प्रवेश होगा। इसके बाद 1 अगस्त को चित्रकूटधाम में गुरु गुणानुवाद कार्यक्रम तथा 2 अगस्त को मंगल कलश स्थापना होगी। वहीं 15 से 30 अगस्त तक ज्ञान गंगा महोत्सव आयोजित किया जाएगा। प्रतिदिन सुबह 8:30 बजे से 10:00 बजे तक शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में नियमित प्रवचन होंगे।
‘व्यक्ति नहीं, सिस्टम बदलने की जरूरत’
दिल्ली में छात्रों के आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए पुलकसागरजी महाराज ने कहा कि युवाओं में ऊर्जा की कमी नहीं है, बल्कि उन्हें सही दिशा देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं के साथ कठोरता उचित नहीं है और उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि केवल किसी व्यक्ति का इस्तीफा लेने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि व्यवस्था में सुधार आवश्यक है। “व्यक्ति नहीं, सिस्टम बदलने की जरूरत है।”
सन्यास की कोई निश्चित उम्र नहीं
सन्यास और दीक्षा के विषय में उन्होंने कहा कि वैराग्य की भावना किसी भी आयु में जागृत हो सकती है, इसलिए सन्यास की कोई निश्चित उम्र नहीं होती। यदि कोई बालक दीक्षा लेना चाहता है तो उसे रोकना नहीं चाहिए, क्योंकि वह कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ रहा होता है।
संथारा के संबंध में उन्होंने कहा कि यह शांत भाव से जीवन त्यागने की आध्यात्मिक साधना है और इसे आत्महत्या नहीं कहा जा सकता। यह आत्मिक साधना का सर्वोच्च स्वरूप है।
25 जुलाई को निकलेगी भव्य राजशाही शोभायात्रा
चातुर्मास संयोजक मनीष शाह ने बताया कि 25 जुलाई को सर्व समाज के सहयोग से पूज्य गुरुदेव का भव्य राजशाही स्वागत किया जाएगा। छह संत और तीन क्षुल्लिकाओं के साथ मंगल प्रवेश शोभायात्रा शाम 4 बजे रामधाम से प्रारंभ होकर रेलवे फाटक, स्टेशन चौराहा, गोल प्याऊ, नेताजी सुभाष मार्केट, सिंधुनगर और पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर होते हुए सूर्यमहल पहुंचेगी।
शोभायात्रा में ड्रोन से पुष्पवर्षा, नासिक का प्रसिद्ध ढोल बैंड, उज्जैन का महाकाल ताशा बैंड तथा पुष्कर के अंतरराष्ट्रीय नगाड़ा वादक नाथूसिंह सोलंकी की प्रस्तुति विशेष आकर्षण रहेगी। दिगम्बर जैन महिला मंडलों द्वारा देशभक्ति और धर्म संस्कृति पर आधारित सजीव झांकियां भी निकाली जाएंगी।
विहार यात्रा जारी
पुलकसागरजी महाराज का विहार गुरुवार सुबह हमीरगढ़ स्थित नितिन स्पिनर्स से प्रारंभ होकर मंडपिया स्थित आरएसडब्ल्यूएम परिसर पहुंचा। विहार यात्रा में संयोजकों के नेतृत्व में 100 से अधिक युवा श्रद्धालु धर्मध्वजा के साथ शामिल हुए। शुक्रवार को विहार शाह फार्म हाउस तक पहुंचेगा तथा शनिवार को जय विलास होटल से रवाना होकर रामधाम चौराहे से भीलवाड़ा नगर में चातुर्मासिक मंगल प्रवेश होगा।
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Bhilwara, Rajasthan
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