‘सुरक्षित स्थान, जहां सपनों को पंख मिलते हैं’ अभियान के तहत न्यायिक अधिकारियों और पैनल अधिवक्ताओं ने बच्चों को अधिकारों व सुरक्षा के प्रति किया जागरूक
सवाई माधोपुर। विद्यार्थियों को उनके अधिकारों और विद्यालयों में सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण के महत्व से अवगत कराने के लिए मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को जिलेभर में जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सवाई माधोपुर के तत्वावधान में ‘सुरक्षित स्थान, जहां सपनों को पंख मिलते हैं’ विषय पर आयोजित इन शिविरों में लगभग 3050 विद्यार्थियों को जागरूक किया गया।
यह कार्यक्रम ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे के अवसर पर आयोजित हुआ। जिला मुख्यालय सहित गंगापुर सिटी, खंडार, बौंली और चौथ का बरवाड़ा तालुका क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों में न्यायिक अधिकारियों एवं पैनल अधिवक्ताओं ने विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, विद्यालय सुरक्षा और विधिक सहायता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी।
जिला एवं सेशन न्यायाधीश ने किया शिविर का आयोजन
जिला मुख्यालय सवाई माधोपुर में जिला एवं सेशन न्यायाधीश श्रीमती अनु अग्रवाल ने महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, साहूनगर में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया।
इसके अतिरिक्त जिले के विभिन्न विद्यालयों में न्यायिक अधिकारियों और पैनल अधिवक्ताओं ने विद्यार्थियों को निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 19 के प्रावधानों तथा इसके अंतर्गत बच्चों को प्राप्त अधिकारों की जानकारी दी।
विद्यालयों में सुरक्षित वातावरण और आधारभूत सुविधाओं पर जोर
शिविरों में विद्यार्थियों को आरटीई अधिनियम के महत्व, विद्यालयों में आवश्यक आधारभूत संरचना तथा सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण की जरूरत के बारे में बताया गया। साथ ही विद्यालयों में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
विद्यार्थियों को असुरक्षित विद्यालयी भवनों और आधारभूत सुविधाओं की कमी से उत्पन्न होने वाले जोखिमों, खतरनाक परिस्थितियों के चेतावनी संकेतों तथा ऐसी स्थितियों का बच्चों और उनके परिवारों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों के बारे में भी जानकारी दी गई।
आपात स्थिति में क्या करें, विद्यार्थियों को बताया
जागरूकता शिविरों में बच्चों को विद्यालय परिसर में सुरक्षित रहने के उपायों और किसी आपातकालीन स्थिति में उठाए जाने वाले आवश्यक कदमों के बारे में बताया गया। इसके साथ ही विद्यालय को सुरक्षित बनाने में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया।
न्यायिक अधिकारियों एवं पैनल अधिवक्ताओं ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और किसी असुरक्षित परिस्थिति में अपनी सुरक्षा के लिए आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वह बिना भय के शिक्षा प्राप्त कर सके।
बच्चों की शिक्षा और सर्वांगीण विकास के लिए सुरक्षा जरूरी
शिविरों में बताया गया कि सुरक्षित विद्यालयी वातावरण बच्चों की शिक्षा, आत्मविश्वास और सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। भयमुक्त एवं अनुकूल माहौल बच्चों को निर्भीक होकर पढ़ने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
साथ ही शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों को विद्यालयों में सुरक्षा से जुड़े संभावित खतरों के प्रति सतर्क रहने तथा किसी समस्या की स्थिति में उचित सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।
विधिक सहायता और हेल्पलाइन नंबरों की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को आपातकालीन सहायता और विधिक मार्गदर्शन के लिए विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी गई। इनमें पुलिस हेल्पलाइन 100 एवं 112, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, नालसा हेल्पलाइन 15100 तथा रालसा हेल्पलाइन 9928900900 शामिल हैं।
विद्यार्थियों को बताया गया कि असुरक्षित परिस्थिति, अधिकारों के उल्लंघन या विधिक सहायता की आवश्यकता होने पर संबंधित हेल्पलाइन और विधिक सेवा संस्थाओं से संपर्क कर सहायता प्राप्त की जा सकती है।
इस दौरान राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों की ओर से बच्चों के अधिकारों की रक्षा, उन्हें विधिक सहायता उपलब्ध कराने तथा सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी गई।
हर बच्चे को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने का उद्देश्य
इन जागरूकता शिविरों का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, विद्यालयों में सुरक्षा के महत्व को समझाना और प्रत्येक बच्चे को भयमुक्त एवं सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के प्रति जागरूकता विकसित करना रहा।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बच्चों की सुरक्षा केवल विद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और संबंधित संस्थाओं की साझा जिम्मेदारी है। सुरक्षित वातावरण में ही बच्चे आत्मविश्वास के साथ शिक्षा प्राप्त कर अपने भविष्य के सपनों को साकार कर सकते हैं।
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