शाहपुरा में समय से पहले दिखी सावन की डोकरी, पर्यावरण बदलाव का संकेत


नूर बाग में 15-20 दिन पहले नजर आया लाल मखमली जीव, विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन और बदलते मौसम चक्र पर जताई चिंता।

शाहपुरा। शाहपुरा के ऐतिहासिक नूर बाग क्षेत्र में इस वर्ष बरसात के मौसम में दिखाई देने वाला लाल मखमली जीव ‘सावन की डोकरी’ (रेड वेलवेट माइट) सावन शुरू होने से करीब 15 से 20 दिन पहले ही नजर आने लगा है। वर्षों से ग्रामीण अंचलों में इस जीव को अच्छी वर्षा और समृद्ध फसल का शुभ संकेत माना जाता रहा है, लेकिन इस बार इसका समय से पहले दिखाई देना पर्यावरण विशेषज्ञों और प्रकृति प्रेमियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

लोक मान्यता और विज्ञान की अलग-अलग व्याख्या

ग्रामीण संस्कृति में सावन की डोकरी का विशेष महत्व है। खेतों और बाग-बगीचों में इसका लाल मखमली स्वरूप दिखाई देते ही किसान इसे अच्छी बारिश का संकेत मानते हैं। हालांकि वैज्ञानिकों के अनुसार रेड वेलवेट माइट का बाहर निकलना मिट्टी की नमी, तापमान, आर्द्रता और शुरुआती वर्षा पर निर्भर करता है। यदि मानसून पूर्व वातावरण अनुकूल हो जाए तो यह जीव सामान्य समय से पहले भी दिखाई दे सकता है।

जलवायु परिवर्तन का असर बताया

जीव दया सेवा समिति के संयोजक एवं पर्यावरण प्रेमी अतू खां कायमखानी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का पारंपरिक चक्र प्रभावित हुआ है। समय से पहले या देर से वर्षा, बढ़ता तापमान, जंगलों की कटाई, भूजल स्तर में गिरावट और रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। यही कारण है कि अनेक जीव-जंतुओं के जीवन चक्र में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे जीव भी पारिस्थितिकी तंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं और इनके व्यवहार में बदलाव प्रकृति के बदलते स्वरूप का संकेत हो सकता है।

मिट्टी के लिए लाभकारी है रेड वेलवेट माइट

विशेषज्ञों के अनुसार रेड वेलवेट माइट केवल आकर्षक जीव ही नहीं, बल्कि प्रकृति का एक महत्वपूर्ण सहयोगी भी है। यह मिट्टी में रहने वाले कई हानिकारक कीटों, उनके अंडों और सूक्ष्म जीवों की संख्या नियंत्रित करता है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता और जैविक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।

यदि किसी क्षेत्र में यह जीव बड़ी संख्या में दिखाई देता है तो इसे मिट्टी में अच्छी जैव विविधता और पर्याप्त नमी का संकेत माना जाता है। वहीं असामान्य समय पर इसका दिखाई देना बदलते पर्यावरणीय पैटर्न की ओर भी इशारा करता है।

पर्यावरण संरक्षण की अपील

अतू खां कायमखानी ने लोगों से अपील की कि ऐसे उपयोगी जीवों को नुकसान न पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि अधिक पौधारोपण, जल स्रोतों का संरक्षण, जंगलों की सुरक्षा और रासायनिक कीटनाशकों के सीमित उपयोग से ही प्राकृतिक संतुलन बनाए रखा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रकृति का प्रत्येक जीव मानव जीवन और पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है तथा हमें उसके संरक्षण के प्रति जागरूक होना चाहिए।

चर्चा का विषय बनी समयपूर्व दस्तक

फिलहाल शाहपुरा के नूर बाग में समय से पहले दिखाई दी सावन की डोकरी चर्चा का विषय बनी हुई है। जहां ग्रामीण इसे शुभ संकेत मान रहे हैं, वहीं पर्यावरणविद इसे जलवायु परिवर्तन और बदलते मौसम चक्र की चेतावनी के रूप में देख रहे हैं।

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