वन्यजीव संरक्षण क्विज में बच्चों ने दिखाई पर्यावरण के प्रति समझ


इंटेक ने सुभाष नगर स्कूल में कराई प्रतियोगिता, उत्कृष्ट विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र मिले, पौधारोपण और पॉलीथिन से दूरी का संदेश

भीलवाड़ा। वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण का संदेश केवल किताबों तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों की समझ और व्यवहार का हिस्सा बने, इसी उद्देश्य से वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के तहत इंटेक भीलवाड़ा चैप्टर की ओर से राजकीय सुभाष नगर विद्यालय में पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण विषय पर क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई।

प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने वन्यजीव, प्रकृति और पर्यावरण संतुलन से जुड़े सवालों के जवाब देकर अपनी जागरूकता और समझ का परिचय दिया।

वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का दिया संदेश

इंटेक कन्वीनर बाबूलाल जाजू ने विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और प्रकृति के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से पॉलीथिन का उपयोग नहीं करने तथा अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत छोटी-छोटी आदतों में बदलाव से होती है। विद्यार्थियों की जागरूकता को व्यवहार में उतारने से प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र

क्विज प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले नारायण सिंह, कुलदीप सेन, कृष्ण सांसी, दर्शना विश्नोई, कुशाल सिंह, अनु कुमावत, कुलदीप सोनी, अनुज वैष्णव, देवराज गुर्जर, शिवम धोबी, शुभम सुथार और सूर्य प्रकाश गहलोत को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता के माध्यम से वन्यजीवों और पर्यावरण से जुड़े विषयों की जानकारी को समझने के साथ अपनी जागरूकता का प्रदर्शन किया।

विद्यालय स्टाफ ने किया सहयोग

कार्यक्रम में विद्यालय की प्रिंसिपल उर्मिला जोशी, शिक्षक मधु लढा, कुसुम तिवारी, मीनाक्षी शर्मा, दीपमाला, मुन्नी सुखवाल, नीलम चौहान, सुमन सुवालका एवं पीटीआई लक्ष्मण सहित अन्य शिक्षकों का सहयोग रहा।

विद्यालय कार्यक्रम प्रभारी गुमानसिंह पीपाड़ा ने विद्यार्थियों को इंटेक संस्था की गतिविधियों और उसके उद्देश्यों की जानकारी दी।

विद्यार्थियों से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यावरण बचाने में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया गया। उन्हें पौधारोपण, पौधों की देखभाल और पॉलीथिन से दूरी जैसे छोटे लेकिन प्रभावी कदमों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।

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