ज्ञान और वैराग्य की देवी स्कंदमाता की पूजा से जीवन में मिलती है सुख शांति व सफलता की प्राप्ति


प्रयागराज।राजदेव द्विवेदी। नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता भगवान शिव और माता पार्वती की पुत्र भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता हैं। स्कंदमाता को ज्ञान और वैराग्य की देवी माना जाता है।स्कंदमाता की कथा भगवान स्कंद के जन्म से जुड़ी हुई है। भगवान स्कंद का जन्म तारकासुर नामक राक्षस को मारने के लिए हुआ था। तारकासुर को यह वरदान प्राप्त था कि वह भगवान शिव के पुत्र द्वारा ही मारा जा सकता है।भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह होने के बाद, भगवान स्कंद का जन्म हुआ। स्कंदमाता ने अपने पुत्र को वीरता और ज्ञान के गुणों से संपन्न किया। भगवान स्कंद ने तारकासुर का वध किया और देवताओं की रक्षा की।
स्कंदमाता की पूजा करने से ज्ञान, वैराग्य और वीरता की प्राप्ति होती है। स्कंदमाता की कृपा से जीवन में सफलता और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा करने से विशेष लाभ होता है।स्कंदमाता की पूजा करने के लिए स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।पूजा स्थल को साफ करें और स्कंदमाता की प्रतिमा स्थापित करें।स्कंदमाता का ध्यान करें और उनकी स्तुति करें।स्कंदमाता को पुष्प, फल, और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।स्कंदमाता की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
स्कंदमाता की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और सफलता की प्राप्ति होती है।


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