विशेष संवाददाता : राजस्थान प्रदेश द्वारा जारी मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल 181 नम्बर पर फोन द्वारा दर्ज कराई जाने वाली शिकायतों की निवारण प्रक्रिया पर आरटीआई कार्यकर्ता, हिन्दुस्तान शिवसेना के राष्ट्रीय प्रमुख एवं दिल्ली हाई कोर्ट के एडवोकेट राजेन्द्रसिंह तोमर राजा भईया ने गम्भीर आरोप लगाते हुए हुए इसे सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है, वैसे गौर किया जाए तो उनके आरोप तथ्यात्मक है इस बारे में उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को रजिस्टर्ड डॉक द्वारा भेजी अपनी शिकायतो में आरोप लगाया है कि उक्त टोल फ्री नम्बर पर किसी भी पीड़ित द्वारा शिकायत दर्ज कराने पर उस शिकायत को उसी विभाग को कार्यवाही करने हेतु भेजा जाता है यहां तक तो ठीक है? परन्तु संबंधित विभाग के मुखिया या प्रमुख अधिकारी स्वयं पीड़ित की शिकायत पर जांच नहीं करते बल्कि उसी अधिकारी को शिकायत कार्यवाही हेतु अग्रसर कर देते हैं जिसके विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई गई होती है और वह अधिकारी झूठी रिपोर्ट बना कर पीड़ित को बिना राहत पहुंचाए और उसकी शिकायत का निवारण किए बिना अपनी गलतियों को छुपाते हुऐ रिपोर्ट को पोर्टल पर भेज देते है? उसके बाद मुख्यमंत्री जन शिकायत पोर्टल पर बैठे कर्मचारी द्वारा पीड़ित को उसकी शिकायत पर भेजी रिपोर्ट के बारे में बता संतुष्टि या असंतुष्टि दर्ज कराने हेतु फोन किया जाता है, और जब पीड़ित को कोई राहत नहीं मिलती और उसका निवारण नहीं होता तो वह अपनी असंतुष्टि दर्ज कराता है तो दो बार असंतुष्टि दर्ज कराने पर स्वतः ही उसकी दर्ज शिकायत को बिना पीड़ित को राहत प्रदान किए और शिकायत का निवारण किए बन्द कर दिया जाता है? और उसे पुनः उसी मुद्दे पर दुबारा शिकायत दर्ज करने की सलाह दी जाती है ? राजा भईया ने बताया कि वह स्वयं इसके भुक्तभोगी हैं, अधिवक्ता होने के नाते कानूनी जानकारी के अनुसार उन्होंने बताया कि नियम व कानून के अनुसार कोई भी अधिकारी/ कर्मचारी खुद अपने खिलाफ दर्ज शिकायत पर जांच नहीं कर सकता ना ही कोई रिपोर्ट तैयार कर वरिष्ठ अधिकारीयों को भेज सकता है पीड़ित द्वारा दर्ज शिकायत की जांच या तो विभाग की विजिलेंस जांच कमेटी को करनी होती है या वरिष्ठ अधिकारीयों को करनी होती है, परन्तु यहां तो सभी नियम कानून ताक पर रख उल्टी गंगा बहाई जा रही है ? पीड़ित को राहत प्रदान किए बिना ही उसकी दर्ज शिकायत को बन्द किया जाना और उसे पुनः वही शिकायत दर्ज करने की सलाह दिया जाना पीड़ित के साथ सिर्फ धोखा है इससे पीड़ित का कीमती समय तो बर्बाद होता ही है साथ ही साथ उसे उक्त पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने का कोई लाभ भी नहीं मिलता जब पीड़ित द्वारा उसकी शिकायत पर असंतुष्टि दर्ज कराई गई है तो इसका सीधा सीधा अर्थ है कि उसे कोई राहत प्रदान नहीं हुई है और वह संबंधित विभाग द्वारा की गई झुठी कार्यवाही से संतुष्ट नहीं है उसकी शिकायत का कोई समाधान नहीं हुआ है, फिर ऐसे में पीड़ित की दर्ज शिकायत को बन्द करने का आखिर क्या औचित्य है? और किस नियम के तहत पीड़ित की शिकायत को बन्द किया जाता है? मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को भेजी शिकायतों की प्रतियां पत्रकारों को देते हुऐ राजा भईया ने बताया कि उन्होंने तत्काल उपरोक्त खामियों को उक्त पोर्टल पर दर्ज होने वाली शिकायतों के संबंध में दूर किये जाने एवं पारदर्शिता लाने तथा संबंधित विभाग की विजिलेंस जांच कमेटी या वरिष्ठ अधिकारीयों से पीड़ित की शिकायत पर जांच कराने और रिपोर्ट पेश करने तथा इस बाबत सटीक एवं स्पष्ट गाईड लाईन तथा नियम बना कर लागू करने की मांग की है ताकि भविष्य में पीड़ित को उक्त पोर्टल पर दर्ज कराई शिकायतों का लाभ मिल सके। अब ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि संबंधित अधिकारीयों द्वारा इस बाबत क्या कार्यवाही की जाती हैं और कब तक की जाती हैं वैसे राजा भईया की इस शिकायत ने 181 पोर्टल के संबंधित सभी अधिकारियों में खलबली जरूर मचा दी है।
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